
इंदौर. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों नागरिकों के बीमार पड़ने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए निगमायुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. कोर्ट ने साफ कहा है कि इस गंभीर घटना से जुड़े सभी तथ्यों को शपथपत्र के साथ पेश किया जाए.
इंदौर में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की अवकाशकालीन विशेष युगलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस डी डी बसंल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की पीठ ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किए. सरकार की ओर से पेश की गई 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया कि दूषित पानी के कारण इंदौर में चार लोगों की मौत हुई है. हाईकोर्ट के समक्ष बताया कि अब तक 294 नागरिकों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा, जिनमें 32 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में हैं. 93 मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि 201 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को रिकॉर्ड में लेते हुए स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के संकेत दिए हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि भागीरथपुरा थाना क्षेत्र के समीप जल आपूर्ति के प्रदूषण बिंदु की पहचान की जा चुकी है और दूषित जल आपूर्ति का कारण बनी संरचना को हटाया गया है. कोर्ट के समक्ष यह जानकारी भी रखी गई कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा और अगली सुनवाई में जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस जवाब अपेक्षित हैं. न्यायालय ने याचिकाओं पर अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय करते हुए सरकार से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट और आगे की कार्यवाई का ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
