इतिहास रचने के करीब रोहित-विराट: लगातार क्रिकेट, कड़ा सफर और वर्कलोड मैनेजमेंट के बीच फंसी टीम इंडिया

नयी दिल्ली, भारतीय क्रिकेट टीम के व्यस्त शेड्यूल और 2027 वर्ल्ड कप के बीच रोहित-विराट ऐतिहासिक कीर्तिमानों के करीब हैं। जानिए वर्कलोड मैनेजमेंट की पूरी रणनीति।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आधिकारिक तौर पर क्रिकेट के एक ऐसे मुश्किल और लगातार चलने वाले दौर की शुरुआत कर दी है जो सर्दियों से लेकर 2027 की शुरुआत तक चलेगा। इसमें 16 T20I, 14 वनडे और 7 टेस्ट मैच शामिल हैं। आने वाले महीने सिर्फ एक व्यस्त शेड्यूल से कहीं ज्यादा हैं ये भारतीय क्रिकेट के लिए एक अहम मोड़ हैं।

दिग्गज खिलाड़ियों के व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अमर होने की संभावना से लेकर वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर बोर्डरूम में होने वाली बड़ी लड़ाई तक, 2027 वनडे वर्ल्ड कप का सफ़र आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है।

रोहित-विराट का माइलस्टोन टूर
पिछले कुछ सीजन में रोहित शर्मा और विराट कोहली के T20I और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब आने वाले 14 वनडे मैच इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के लिए एक खास ‘माइलस्टोन टूर’ बन गए हैं। आने वाला शेड्यूल जितना रन बनाने की रेस है, उतना ही ये खिलाड़ियों की ताकत की परीक्षा भी है। आने वाला शेड्यूल जितना रन बनाने की रेस है, उतना ही ये खिलाड़ियों की ताकत की परीक्षा भी है।

14-वनडे वाले इस साइकल के आखिर तक विराट कोहली तेजी से एमएस धोनी के सबसे ज्यादा मैच खेलने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएगें, वहीं कप्तान रोहित शर्मा इतिहास में 300-वनडे मैच खेलने वाले क्लब में शामिल होने वाले सिर्फ आठवें भारतीय बनने के लिए तैयार हैं। और अधिक आने वाले करियर के रिकॉर्ड-

विराट कोहली-

वनडे में बनाए गए रन- 14,941 रन, जिसमें उनका करियर बैटिंग औसत 58 से ज्यादा रहा है। वे अभी वनडे इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।

बाउंड्री- वनडे क्रिकेट में 1,389 चौके और टेस्ट में कुल 301 चौके। इस तरह वे अब तक की इंटरनेशनल बाउंड्री लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं।

छक्के- वनडे में 171 छक्के और सभी इंटरनेशनल फॅार्मेट में कुल 325 छक्के।

खास उपलब्धियां- उनके नाम सबसे ज्यादा वनडे शतक (54) लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है और वे इतिहास में सबसे तेजी से 10,000, 11,000, 12,000, 13,000 और 14,000 वनडे रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।

रोहित शर्मा

खेले गए वनडे मैच- 288 मैचों में 280 पारियां, वे जल्द ही 300 मैचों वाले खास क्लब में शामिल होने वाले हैं।

वनडे में बनाए गए रन- 11,895 रन, 93.04 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट के साथ, उन्होंने 34 शतक भी लगाए हैं।

बाउंड्री- वनडे में 1,119 चौके लगाए। उनके नाम एक ही वनडे पारी में सबसे ज्यादा चौके लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसमें उन्होनें 33 चौके लगाए थे।

छक्के- वनडे में 355 छक्के और कुल मिलाकर 600 से ज्यादा इंटरनेशनल छक्के। वे इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी हैं।

खास उपलब्धियां- वे दुनिया के इकलौते ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने वनडे में तीन दोहरे शतक लगाए हैं और उनके नाम वनडे में किसी एक खिलाड़ी द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा रनों (श्रीलंका के खिलाफ 264 रन) का वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

वर्कलोड की जंग शुरु
हालांकि, इस व्यस्त कैलेंडर की वजह से BCCI और IPL फ्रेंचाइजी के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। जनवरी और फरवरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार 5 टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के साथ खिलाड़ियों पर शारीरिक दबाव अपनी चरम सीमा पर होगा।

सहनशक्ति की ये कड़ी परीक्षा IPL 2027 के संभावित 10 मार्च से शुरू होने से कुछ ही दिन पहले खत्म होगी। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और उम्रदराज मुख्य खिलाड़ियों जैसे अहम खिलाड़ियों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए ऐसी खबरें हैं कि BCCI कड़े निर्देश जारी कर सकता है।

इन निर्देशों में बड़े खिलाड़ियों को IPL 2027 के कुछ हिस्सों में न खेलने या अपनी भागीदारी सीमित करने की सलाह दी जा सकती है। BCCI के इस संभावित दखल से फ्रेंचाइजी मालिकों में दबी-छुपी चिंता पैदा हो गई है, क्योंकि उन्हें टूर्नामेंट के अहम दौर में अपने करोड़ों डॉलर के मैच-विनर खिलाड़ियों के बाहर होने का डर सता रहा है।

ऑडिशन मैट्रिक्स और लॉजिस्टिकल चुनौतियां
जहां सीनियर खिलाड़ी 50-ओवर के फॅार्मेट पर ध्यान दे रहे हैं वहीं भारत के 16 T20I मैच जिनमें अफगानिस्तान, वेस्ट इंडीज, न्यूजीलैंड और श्रीलंका के खिलाफ सीरीज शामिल हैं वो अगली पीढ़ी के मुख्य खिलाड़ियों के लिए एक हाई-प्रेशर कॉर्पोरेट ऑडिशन की तरह होंगे। रोहित और कोहली के बाद के T20 दौर में जगह बनाने के लिए यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल और रिंकू सिंह जैसे युवा खिलाड़ी टीम में अपनी पक्की जगह बनाने की कोशिश करेंगे।

इस दबाव को और बढ़ाने वाली चीज है लॉजिस्टिक्स का मुश्किल रोडमैप। खिलाड़ियों को यात्रा की भारी थकान से निपटना होगा क्योंकि वे न्यूजीलैंड के कड़ाके की ठंड वाले दौरे से सीधे तेजी से होने वाले कई शहरों में खेले जाने वाले घरेलू सीजन में शामिल होंगे। अलग-अलग टाइम जोन और पिच की अलग-अलग स्थितियों के बीच रिकवरी को मैनेज करना टीम के मेडिकल और सपोर्ट स्टाफ के लिए भी उतनी ही बड़ी चुनौती होगी, जितनी मैदान पर खिलाड़ियों के लिए।

फैंस के जोश भरे उत्साह
इस पूरे दौर में जो चीज सबसे ज्यादा जोश भर रही है और वो है भारतीय फैन्स का उत्साह। डिजिटल क्रिकेट फोरम पर जबरदस्त उत्साह और समझदारी भरी सोच का मिला-जुला माहौल है। जहां समर्थक घरेलू सीरीज की शुरुआत में कोहली और शर्मा से कई शतक लगने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं वे समझदारी से टीम में खिलाड़ियों को बदलने की भी वकालत कर रहे हैं।

ऑनलाइन आम राय ये है कि जिम्बाब्वे जैसी बदलती हुई टीमों के खिलाफ बेंच स्ट्रेंथ को आजमाया जाए। लोग समझते हैं कि लंबे समय का लक्ष्य सिर्फ अलग-अलग द्विपक्षीय सीरीज जीतना नहीं है बल्कि 2027 वर्ल्ड कप तक एक पूरी तरह फिट और अनुभवी टीम तैयार करना है। जैसे ही दिल्ली में मुकाबले शुरू होंगे, दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि क्या टीम इंडिया इस लंबे और मुश्किल सफर में कामयाब हो पाती है या नहीं।

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