
इंदौर. शहर के मिल क्षेत्र में वृद्धावस्था पेंशन व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है. जब जीवन के इस पड़ाव पर बुजुर्गों को सरकारी सहायता के लिए महीनों इंतजार करना पड़े या उनकी पेंशन बिना किसी स्पष्ट कारण के वर्षों बंद रहे, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक खामियों और संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है.
मिल क्षेत्र में मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बड़ी आबादी रहती है. क्षेत्र के शिवाजी नगर भिंडी खऊ में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर बुजुर्ग काफी परेशान हैं. क्षेत्र में कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी पेंशन पिछले कई वर्षों से बंद है, जबकि कुछ पात्र बुजुर्गों को नियमित मासिक भुगतान के बजाय कई-कई महीने इंतजार करना पड़ रहा है. देश में सामाजिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम एनपीएपी 3.09 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचता है. अप्रैल 2026 तक केंद्रीय सामाजिक पेंशन घटक में 2.92 करोड़ से अधिक लाभार्थी शामिल थे. मध्यप्रदेश सरकार भी बुजुर्गों सहित जरूरतमंद वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं संचालित करती है. ऐसे में सवाल यह है कि योजना होने के बावजूद भिंडी खऊ के बुजुर्गों को समय पर उनका हक क्यों नहीं मिल रहा? क्या विभाग बंद पेंशन और लंबित भुगतान की जांच करेगा?
यह बोले हितग्राही…
मेरा एक ही लड़का था, जिसका निधन हो चुका है. मेरा सहारा कोई नहीं है. पेंशन के पैसे से कुछ सहारा मिल जाता था. एक साल से पेंशन बंद हो चुकी है. किससे कहें, कोई जिम्मेदार सुनता ही नहीं.
– इंदू बाई
अस्सी वर्ष की उम्र हो चुकी है. पेंशन बंद हुए दो वर्ष हो चुके हैं. फॉर्म भरा और एक्सीडेंट में पैर फैख्र हो गया, नहीं जा पाई तो पेंशन बंद कर दी.
– शिला बाई सोंडके
क्षेत्र में बहुत लोगों को पेंशन नहीं मिल रही. दफ्तरों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाने के बावजूद बुजुर्गों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. मेरी पेंशन समय पर नहीं मिलती. रुक-रुककर आती है. इस कारण समस्या होती है.
– नवनाथ चौवरे
