नयी दिल्ली, (वार्ता) शोधन अक्षमता एवं दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) ने दिवाला कानून के दुरुपयोग के प्रति शोधन अक्षमता पेशेवरों (आईपी) को आगाह करते हुए बुधवार को कहा कि उन्हें ऐसे मामलों की पहचान कर एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
बोर्ड ने सभी पंजीकृत आईपी, शोधन अक्षमता के क्षेत्र में काम करने वाली पेशेवर इकाइयों और एजेंसियों को भेजे गए एक परिपत्र में लिखा है कि उसके संज्ञान में कुछ ऐसे मामले आये हैं जिनमें दिवाला कानून का दुरुपयोग किया गया है। चूंकि आईपी के पास ऋणदाता और ऋणकर्ता दोनों के बही-खातों की जानकारी होती है, इसलिए वे इसकी पहचान करने की स्थिति में होते हैं।
आईबीबीआई ने कुछ ऐसे संकेतकों के बारे में बताया है जिससे कानून के दुरुपयोग की पहचान संभव है। इनमें शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया से ठीक पहले बैंक सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों से इतर किसी एक ऋणदाता से बड़ा ऋण लेना शामिल है जो ऋणदाताओं की समिति में उस ऋणदाता को निर्णायक स्थिति में ला देता है।
इसके अलावा यदि कुछ ऋणकर्ताओं का एक ऐसा समूह हो जिसमें ऋणदाताओं की सूची में अधिकतर नाम एक जैसे हों तो यह भी दाल में काले की तरफ इशारा करता है। संबंधित ऋणकर्ताओं से जुड़ी समाधान प्रक्रिया में नियमित रूप से प्रतिस्पर्धी बोली की कमी भी इसका एक संकेतक हो सकता है।
बोर्ड ने कहा है कि यदि दावों की तुलना में ऋणदाताओं को काफी कम रकम की वसूली हो रही है, तब भी आईपी को इसकी जांच करनी चाहिए। यदि ऋणकर्ता या संबंधित संस्थान के खिलाफ कोई दूसरी एजेंसी फर्जीवाड़े के मामले की जांच कर रही हो तब भी आईपी को शक करना चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि ये संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि संबंधित मामले में दुरुपयोग की आशंका बनती है। हालांकि यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि अनिवार्य रूप से गलत हो रहा है, कुछ मामलों में इसके पीछे ठोस और सही कारण भी हो सकते हैं। आईपी को हिदायत दी गयी है कि वे इस तरह के मामलों के बारे में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के पास तथ्यों के साथ आवेदन दें।
