
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर शहर में चल रहे विकास कार्यों के बीच मकान-दुकान प्रभावितों की पहली बड़ी जीत सामने आई है। हरिफाटक समानांतर ब्रिज और प्रस्तावित अंडरपास की राह में आ रहे 12 खोली क्षेत्र के मकानों को हटाने के मामले में रहवासियों को जबलपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है।
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार प्रभावित रहवासियों ने पहले इंदौर हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां उनकी याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट की शरण ली। जबलपुर हाईकोर्ट ने मामले में प्रभावित रहवासियों के पक्ष को राहत देते हुए सरकार और प्रशासन को भूमि अधिग्रहण की विधिवत प्रक्रिया अपनाकर आगे बढऩे की बात कही है। यानी विकास कार्य के लिए जमीन की आवश्यकता होने पर कानून के अनुसार अधिग्रहण और पात्र प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया अपनानी होगी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर में विकास, सडक़ चौड़ीकरण, पुल और अंडरपास जैसे निर्माण जरूरी हैं और इसके लिए भूमि की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि प्रभावित लोगों की जमीन और मकान लेने के लिए विधि के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनानी होगी तथा पात्र प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा देना होगा। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम द्वारा उज्जैन कलेक्टर के पास 4 करोड़ 81 लाख 66 हजार 544 रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं। निगम की ओर से न्यायालय की रजिस्ट्री के समक्ष 10 करोड़ रुपये तक की राशि जमा करने की तैयारी भी बताई गई। आदेश में यह भी उल्लेख है कि प्रभावित याचिकाकर्ताओं को कानून के अनुसार एक सप्ताह के भीतर मुआवजे का भुगतान किया जाए और इसके बाद परिसर खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं जिन लोगों को मुआवजे की राशि अपर्याप्त लगती है, उनके लिए कानून में आगे आपत्ति दर्ज कराने का रास्ता भी उपलब्ध है।
मेहनत रंग लाई, जान दे देंगे, जमीन नहीं, अब लेंगे मुआवजा
इस पूरे मामले में बाराखोली के रहवासीयों ने काफी संघर्ष किया, धरना प्रदर्शन भी किया आंदोलन करते हुए पुलिस और प्रशासन की फटकार भी सहन कि यहां तक की इंदौर हाई कोर्ट से एक दफा केस भी हार गए। बावजूद डटे रहे, लड़ते रहे और अंतत जीत मिली। इंदौर हाईकोर्ट में प्रभावित रहवासियों की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता तहज़ीब खान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इंदौर हाईकोर्ट में मामला खारिज होने के बाद रहवासियों ने हिम्मत नहीं हारी और जबलपुर हाईकोर्ट में अपनी बात रखी। जबलपुर हाईकोर्ट से राहत के बाद 12 खोली के रहवासियों में खुशी और हर्ष का माहौल है। 12 खोली के रहवासियों ने मकान हटाने की कार्रवाई के विरोध में पहले धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया था। उनका कहना था कि वे अपनी जमीन और मकान नहीं छोड़ेंगे। लंबे संघर्ष के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और अब हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे और विधिवत भूमि अधिग्रहण का रास्ता खुला है। अब मुआवजा जो मिलेगा उससे कम से कम सर छुपाने लायक आशियाने की वैकल्पिक व्यवस्था ये लोग कर पाएंगे।
