
जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर नर्सिंग कॉलेज पर तीन-तीन लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा प्रत्येक कॉलेज में पचास- पचास पेड लगाकर उनकी देखरेख के निर्देश कॉलेज प्रबंधन को दिये हैं। पौधारोपण की तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी। कॉलेज प्रबंधन को जुर्माने की राशि एक माह में जमा करनी होगा। तभी उक्त कॉलेजों को उपयुक्त माना जायेगा और छात्रों को परीक्षा में शामिल होने तथा रिजल्ट जारी करने की अनुमति मिलेगी।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में प्रदेश में मान्यता प्रक्रिया के विपरीत नर्सिंग कॉलेज के संचालन को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि नर्सिंग कॉलेजों के मान्यता देने में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। कागजों में संचालित नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गयी है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेज की जांच के निर्देश सीबीआई को दिये थे। सीबीआई जांच में प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों में 156 कॉलेज सूटेबल पाये गये थे। सीबीआई जांच में पाई गई कमियों को दूर कर 89 कॉलेजों भी सूटेबल की श्रेणी में आ गये थे। हाईकोर्ट ने जांच में अनसूटेबल पाया गये कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेज में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये थे। सीबीआई की जांच में पाया गया था कि सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजो तथा डिफ़ीशियेंट पाये गए 153 कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी पायी गई थी।
युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए इन कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान करते हुए पूर्व में हुई परीक्षा के रिजल्ट जारी करने के निर्देश दिये है। यह राहत बीएससी, एमएससी और पोस्ट बेसिक बीएससी छात्रों को मिलेगी । डुप्लीकेट फैकल्टी वाले कॉलेजों को प्रति फैकल्टी 3 लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए एक माह में उक्त राशि जमा करने के निर्देश जारी किये है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 2 लाख एमपीएनआरसी और 1 लाख रुपये जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा करने के बाद ही संबंधित कॉलेजों को उपयुक्त माना जाएगा। इसके बाद इनके छात्रों की परीक्षा आयोजन और रिजल्ट जारी हो सकेंगे।
हाई कोर्ट ने एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को नए कॉलेजों को मान्यता देते समय पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण और मापदंडों के पालन में किसी भी लापरवाही के लिए नियामक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे । हाईकोर्ट ने नए मान्यता दिए गए सभी कॉलेजों का रिकार्ड भी तलब किया है । याचिका पर अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की है।
