ईटानगर, 09 सितंबर (वार्ता) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधायकों से लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखने और प्रदेश तथा राष्ट्र के विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया है। श्री राधाकृष्णन ने बुधवार को यहां विधानसभा की विशेष सत्र में अपने संबोधन में कहा कि विधायी कार्य ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘विकसित भारत-2047’ की दृष्टि से प्रेरित होना चाहिए तथा सदन मेहोने वाली बहस, चर्चा या यहां तक कि व्यवधान भी हमेशा किसी निर्णय तक पहुंचने वाला होना चाहिए।
अरुणाचल प्रदेश को भारत की सीमाओं का गौरवशाली प्रहरी और देश की एकता का अभिन्न अंग बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अरुणाचल की सुरक्षा पूरे देश की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और लगभग 79 प्रतिशत वन आवरण और पूर्वोत्तर के विकास की सराहना करते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा डोनर यानी पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय की स्थापना और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में डोनर मंत्रालय के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने राज्य की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश देश में कीवी का अग्रणी उत्पादक बन गया है, प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक हो गयी है, सड़क निर्माण लगभग 1,800 किलोमीटर प्रति वर्ष पहुंच गया है और एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किये गये हैं। विधायकों से चुनावी सफलता से ऊपर जनसेवा को प्राथमिकता देने और प्रश्नकाल-शून्यकाल का प्रभावी उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने जलविद्युत क्षमता का जिम्मेदारी से उपयोग करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के.टी. परनाइक, विधानसभा अध्यक्ष तेसम पोंगते, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चोवना मीन और अन्य विधायक उपस्थित थे।
