पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को जोड़ने वाले रेल मार्गों पर पटरियां बढ़ाने की परियोजनाएं मंजूर

नयी दिल्ली, 9 सितंबर (वार्ता) भारी आवागमन वाले रेलवे के सात प्रमुख मार्गों को चार पटरियों वाला बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत सरकार ने आज इन मार्गों के कई खंडों पर नयी लाइनों के निर्माण के प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन फैसलों के तहत खड़गपुर – झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी – पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर) – पेंड्रा रोड के बीच तीसरी लाइन की परियोजना शामिल है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को जोड़ने वाली वाली तीन परियोजनाएं भी शामिल हैं जिनसे मौजूदा रेल नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

इन तीन परियोजनाओं पर कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) के इन निर्णयों की जानकारी देते हुए रेल एवं सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैषणव ने कहा कि इन परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने की योजना है।

इनके पूरा होने से परिवहन लागत और कार्बन डाई आक्साइड प्रदूषण में कमी का भारी लाभ होगा। श्री वैष्णव ने कहा कि रेल मार्गों की क्षमता बढ़ने से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता और सेवाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं रेल परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं मोदी सरकार के ‘न्यू इंडिया’ के विजन के अनुरूप हैं। इनके माध्यम से क्षेत्र में व्यापक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा क्षेत्र ‘आत्मनिर्भर’ बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसमें मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श किया गया है।

इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इनसे संबंधित राज्यों के 14 जिलों के लगभग 4,790 गांवों को बेहतर संपर्क सुविधाएं मिलेगीं जिनकी कुल आबादी लगभग 56 लाख है। प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के निकट प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर हैं। क्षमता बढ़ाने के इन कार्यों से अतिरिक्त 2.7 करोड़ टन माल ढुलाई की संभावना है। उन्होंने कहा कि रेल परिवहन पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम है।

इसलिए इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने, लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने, लगभग 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी लाने तथा लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी जो इस संबंध में लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के लाभ के बराबर है।

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