
भोपाल। शहर के जलस्रोतों को अतिक्रमण से बचाने के लिए चल रहे सर्वे के अंतिम दिन केरवा डैम के आसपास बने निर्माणों का सर्वे नहीं हो सका। इसके पीछे डैम का फुल टैंक लेवल (FTL) हासिल नहीं होने का तर्क दिया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि डैम में पानी का FTL जानबूझकर हासिल नहीं होने दिया गया, ताकि प्रभावशाली लोगों के निर्माण सर्वे के दायरे में न आ सकें।
संयुक्त टीम ने पहले कलियासोत डैम क्षेत्र में सर्वे किया। 13 शटर से शुरू हुआ सर्वे साक्षी ढाबे के सामने कलियासोत डैम के जलभराव क्षेत्र तक पहुंचा। टीम ने अरुनेश्वर शरण सिंह देव और ठेकेदार राजेश वाधवानी के बंगले का भी निरीक्षण किया। कलियासोत डैम के FTL क्षेत्र के अंदर करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क चिन्हित की गई। टीम को कई जगह अवैध कब्जे और निर्माण मिले। कुछ फार्म हाउस में पानी भरा मिला, जबकि कई स्थानों पर भराव के लिए बड़ी मात्रा में कोपरा और मुरम भी पाई गई। इसके बाद टीम केरवा डैम पहुंची, लेकिन यहां सर्वे आगे नहीं बढ़ सका। नोडल अधिकारी नीतेश चौरसिया ने FTL अचीव नहीं होने का हवाला देते हुए सर्वे से इनकार किया। इस पर याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने आपत्ति जताई।
उनका आरोप है कि केरवा डैम की वह बाउंड्री वॉल, जो पानी रोकने के लिए बनाई गई थी, टूटी हुई है। यदि पानी के बहाव को रोकने के लिए वहां मिट्टी डालकर जलस्तर बढ़ाया जाता तो डैम का FTL हासिल हो सकता था। इससे FTL की सीमा के अंदर बने निर्माण और अतिक्रमण स्पष्ट रूप से सामने आ जाते।
राशिद नूर खान का आरोप है कि FTL हासिल करने के लिए पानी रोकने का प्रयास नहीं किया गया और इसी आधार पर संयुक्त टीम का सर्वे रोक दिया गया। इससे केरवा डैम के जलभराव क्षेत्र में मौजूद निर्माणों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी।
