मालदीव के राष्ट्रपति ने चागोस द्वीप समूह पर वार्ता के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया

माले, 08 सितंबर (वार्ता) मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर आधिकारिक वार्ता के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंड्रयू बर्नहैम को आमंत्रित किया है। श्री मुइज्जू ने मंगलवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह आमंत्रण दिया। उन्होंने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले को आगे बढ़ाने पर मालदीव की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया।

अपने पत्र में श्री मुइज्जू ने मालदीव और चागोस द्वीप समूह के बीच साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्र में समुद्री संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान अभियानों के लिए मालदीव के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन का भी उल्लेख किया। मालदीव के राष्ट्रपति ने चागोस से जुड़े मामलों में ब्रिटेन के साथ “विश्वसनीय और रचनात्मक साझेदारी” बनाए रखने की अपने देश की प्रतिबद्धता दोहरायी। इसके साथ ही उन्होंने मालदीव सरकार और उसके लोगों के वैध हितों की रक्षा करने पर जोर दिया। श्री मुइज्जू ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर मालदीव और ब्रिटेन के बीच सार्थक संवाद के महत्व को भी रेखांकित किया।

मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने उम्मीद जतायी कि दोनों देशों के बीच नए सिरे से बातचीत से बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मालदीव ने ब्रिटेन को औपचारिक रूप से बता दिया है कि वह चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मान्यता नहीं देता। श्री मुइज्जू ने दो लिखित आपत्तियों और ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान भी मालदीव की चिंताओं से अवगत कराया है।

हिंद महासागर में स्थित मालदीव ने चागोस द्वीप समूह को लेकर अपने हितों का दावा किया है और अपनी स्थिति के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के मंत्री स्टीफन डाउटी ने इससे पहले कहा था कि चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता का मामला ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच है और इसमें मालदीव की कोई भूमिका नहीं है।

चागोस द्वीप समूह को आधिकारिक रूप से ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (बीआईओटी) के नाम से जाना जाता है। यह हिंद महासागर में स्थित है और 19वीं सदी की शुरुआत से ब्रिटेन के नियंत्रण में रहा है। ब्रिटेन की सरकार ने पिछले वर्ष इस क्षेत्र की संप्रभुता मॉरीशस को हस्तांतरित करने पर सहमति जतायी थी। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया स्थित ब्रिटेन-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अड्डे तक पहुंच बरकरार रखी जाएगी। इसके लिए ब्रिटेन को अड्डे को लीज पर लेने के लिए औसतन 10.1 करोड़ पाउंड सालाना भुगतान करना होगा। मॉरीशस लंबे समय से चागोस द्वीप समूह पर अपनी संप्रभुता का दावा करता रहा है और उसने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कानूनी तथा राजनयिक माध्यमों से उठाया है।

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