
जिनेवा, 08 सितंबर (वार्ता/ स्पूतनिक) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। श्री तुर्क ने सोमवार को मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “मैं उद्योग जगत के विशेषज्ञों की इस चिंता से सहमत हूं कि उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानवता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है… मैं आज यहां यह आह्वान कर रहा हूं कि बहुत देर हो जाने से पहले एआई की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए और पुख्ता गारंटी लागू की जाए।”
उनके कार्यालय के हवाले से यह जानकारी दी गयी। श्री तुर्क ने कहा कि वह आने वाले दिनों में दुनिया की प्रमुख एआई विकास कंपनियों को इस संबंध में पत्र भेजेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल केवल कुछ लोगों के पास एआई पर “लगभग असीमित शक्ति” है। उन्होंने कहा, “कम से कम, हमें उन देशों को, जहां एआई का विकास और संचालन हो रहा है तथा जो इसकी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हैं, तय की गयी सीमाओं को लेकर एक साथ आने की जरूरत है।”
इससे पहले दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय ब्यूरो के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप शैलेकेन्स ने चेतावनी दी थी कि एआई का सैन्य इस्तेमाल मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकता है और बड़े पैमाने पर जनहानि का कारण बन सकता है। उन्होंने एआई के अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण नियमन की आवश्यकता पर जोर दिया था। जनवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने भी अनियंत्रित एआई को जलवायु परिवर्तन और परमाणु हथियारों के साथ मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बताया था।
