ब्रिटेन सरकार ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिससे 2027 से भारतीय निर्यातकों को भारी टैक्स राहत मिलेगी

नई दिल्ली, भारतीय उद्योगों और वैश्विक व्यापार जगत के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है, जहां ब्रिटेन सरकार ने भारत की महत्त्वाकांक्षी ‘कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम’ (CCTS) को आधिकारिक रूप से अपनी मान्यता दे दी है। ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) को सूचित किया है कि इस योजना को उनके आगामी ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) के तहत मान्यता प्राप्त विदेशी योजनाओं की सूची में शामिल कर लिया गया है, जिससे भारत से ब्रिटेन माल भेजने वाली कंपनियों को दोहरे कार्बन टैक्स की मार नहीं झेलनी पड़ेगी।

लोहा, स्टील और एल्युमीनियम समेत 7 प्रमुख सेक्टर्स के निर्यातकों को मिलेगा सीधा वित्तीय लाभ

ब्रिटेन द्वारा आगामी 1 जनवरी 2027 से लागू किए जा रहे कार्बन टैक्स के दायरे में आने वाले कई भारतीय उद्योगों को इस मंजूरी से बहुत बड़ा वित्तीय संबल प्राप्त हुआ है। इसके तहत लोहा, स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, फर्टिलाइजर, हाइड्रोजन और कांच-सिरेमिक उद्योगों से जुड़े निर्यातकों को यह सीधा लाभ मिलेगा कि यदि उन्होंने भारत में उत्पादन के दौरान पहले ही कार्बन से जुड़ा कोई शुल्क चुकाया है, तो ब्रिटेन में सामान बेचते समय उन्हें उस राशि की पूरी छूट मिल जाएगी।

भारत-ब्रिटेन के द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी नई मजबूती, तय नियमों का करना होगा पालन

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह ऐतिहासिक सफलता दोनों देशों के बीच हुए व्यापक आर्थिक समझौतों की कड़ी का एक और बड़ा हिस्सा है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आपसी व्यापार अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है। हालांकि, भारतीय निर्यातकों को इस टैक्स छूट का पूरा लाभ उठाने के लिए ब्रिटेन द्वारा निर्धारित कुछ आवश्यक नियमों और शर्तों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।

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