
जबलपुर। चार माह पूर्व इंटर्नशिप की अवधि एक साल बढाये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि खेल प्रारंभ होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता डॉक्टरों को प्रीपीजी एग्जाम में बैठने की अनुमति प्रदान करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विदिशा निवासी डॉ सौरभ रघुवंशी, उज्जैन के डॉ जय शर्मा सहित आठ डॉक्टरों की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उन्होंने चीन में साल 2017 में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया था। कोरोना लगने के कारण उन्हें साल 2019 में घर वापस लौटना पडा था। उन्होंने एमबीबीएस कोर्स की पूरी पढ़ाई ऑनलाइन मोड में की थी। विदेश से एमबीबीएस कोर्स करने वालों को प्रदेश में रजिस्ट्रेशन के लिए एक साल तक इंटर्नशिप करना आवश्यक था। कोरोना काल में उसे बढाकर दो साल कर दिया गया था। एमबीबीएस कोर्स पूर्ण करने के बाद उसने दो साल की इंटर्नशिप प्रारंभ की थी। इंटर्नशिप का कार्यकाल 31 मार्च 2025 को पूर्व होना था। इसके पूर्व भी नवम्बर 2024 में आदेश जारी कर इंटर्नशिप कार्यकाल तीन साल का कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने युद्ध के कारण यूक्रेन तथा फिलीपींस से एमबीबीएस का कोर्स करने वाले मेडिकल छात्रों के इंटर्नशिप कार्यकाल को बढाकर तीन साल किया था। एम.पी. मेडिकल काउंसिल ने विदेश के एमबीबीएस कोर्स करने वाले सभी छात्रों पर उक्त नियम लागू कर दिये। मध्य प्रदेश प्री पीजी एग्जाम जून व जुलाई 2025 में आयोजित है और फार्म भरने की अंतिम तिथि 7 मई निर्धारित की गयी है। इंटर्नशिप की अवधि एक साल बढाने के कारण वह परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो जायेगे। युगलपीठ एम.पी. मेडिकल काउंसिल ने याचिकाकर्ता छात्रों को ऑनलाइन फॉर्म भरने की अनुमति देने के आदेश जारी करते हुए अनावेदको को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
