इस्लामाबाद, (वार्ता) सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की अगले सप्ताह रियाद में ‘मक्का रक्षा गठबंधन’ की सामरिक राजनीतिक रक्षा समिति (एसपीडीसी) की आपातकालीन बैठक करेंगे।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान तीनों देशों के बीच बनी योजना का हवाला देते हुए श्री डार ने बताया कि तीनों देशों के विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों और सेना प्रमुखों की सदस्यता वाली यह समिति क्षेत्रीय स्थिति और जमीनी हकीकत का जायजा लेगी। इससे पहले 25 सितंबर को रियाद में तीनों देशों के सेना प्रमुखों की विशेष बैठक हो चुकी है।
मदीना में बिजली संयंत्र पर हूती हमले का उल्लेख करते हुए श्री डार ने कहा कि पाकिस्तान ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ रक्षा संधि के तहत पाकिस्तान के दायित्वों पर चर्चा की थी।
ईरान ने हूती हमलों से किसी भी संबंध से इनकार करते हुए ‘सैन्य कार्रवाई’ के बजाय हुतियों के साथ ‘राजनीतिक बातचीत’ की सलाह दी है।
श्री डार ने बताया कि वर्तमान में कम से कम छह अन्य देश इस मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने के इच्छुक हैं, लेकिन गठबंधन को पूरी तरह से चालू होने में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा, जिसके बाद ही इसका विस्तार संभव होगा। 7 अगस्त को हस्ताक्षरित इस रक्षा समझौते के तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जायेगा। गठबंधन का पहला महासचिव पाकिस्तान के सेवानिवृत्त उप-लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को नियुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिये हैं। 29 सितंबर को मदीना में एक पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला हुआ था, जबकि इससे पहले आठ सितंबर को हुए हूती हमलों में 73 लोग घायल हो गये थे और ऊर्जा सुविधाओं में आग लग गयी थी।
