
- ₹2 की फेस वैल्यू वाले हर इक्विटी शेयर के लिए ₹601 से ₹632 का प्राइस बैंड रखा गया है।
- यह IPO मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को खुलेगा और गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को बंद होगा।
- निवेशकों को कम से कम 23 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी। इसके बाद 23 के मल्टीपल में बोली।
मुंबई, : कनोहर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने अपने पहले इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए ₹2 की फेस वैल्यू वाले शेयरों का प्राइस बैंड ₹601 से ₹632 प्रति शेयर तय किया है। कंपनी का यह आईपीओ 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) को खुलेगा और 10 सितंबर 2026 (गुरुवार) को बंद होगा।
निवेशक कम से कम 23 शेयरों के लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद 23 के मल्टी में ही शेयर खरीदे जा सकेंगे। आज की तारीख में कंपनी के कुल 7,44,40,000 शेयर (₹2 फेस वैल्यू वाले) जारी हैं।
₹2 की फेस वैल्यू वाला यह इश्यू ₹300 करोड़ तक के नए शेयरों (फ्रेश इश्यू) और प्रमोटर ‘के संस फैमिली ट्रस्ट’ द्वारा 1,19,57,915 शेयरों के ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का मिला-जुला रूप है।
नए शेयरों से मिलने वाले ₹64.1 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी की गांगोल फैसिलिटी में नया प्लांट और मशीनरी खरीदने (कैपेक्स) के लिए होगा। इससे ट्रांसफॉर्मर बनाने की क्षमता बढ़ेगी, बैकवर्ड इंटीग्रेशन सुविधाओं को बढ़ाया व ऑटोमेट किया जाएगा और काम करने की क्षमता बेहतर होगी। इसके अलावा गांगोल प्लांट में ऑफिस बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन व इंटीरियर का काम होगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्लांट्स में सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे और गांगोल फैसिलिटी में सामान लाने-लेजाने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) खरीदी जाएंगी। वहीं, ₹155 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी के रोजाना के कामकाज (वर्किंग कैपिटल) और बाकी सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।
यह इश्यू बुक-बिल्डिंग प्रोसेस के तहत लाया जा रहा है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इसमें से 50% से ज्यादा हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) को नहीं मिलेगा। कम से कम 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) के लिए और कम से कम 35% हिस्सा रिटेल निवेशकों (RIIs) के लिए तय किया गया है।
वित्त वर्ष 2026 में रेवेन्यू के मामले में यह कंपनी देश में ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। कंपनी पावर ट्रांसमिशन, रेलवे, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर डिस्ट्रीब्यूशन जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टरों को अपनी सेवाएं देती है।
31 मार्च 2026 तक कंपनी भारत की उन 5 चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जिनके पास पावर ट्रांसमिशन में इस्तेमाल होने वाले 500 MVA, 400 kV ट्रांसफॉर्मर के लिए शॉर्ट-सर्किट टेस्ट का सर्टिफिकेशन है । कंपनी बड़े पैमाने पर ट्रांसफॉर्मर का शॉर्ट-सर्किट टेस्ट करती है और 31 मार्च 2026 तक 200 से ज्यादा रेटिंग्स का टेस्ट कर चुकी है।
भारतीय रेलवे के रिसर्च और डेवलपमेंट विंग (RDSO) द्वारा 100 MVA, 132 kV स्कॉट ट्रांसफॉर्मर बनाने के लिए देश की सिर्फ 4 कंपनियों को मंजूरी (सर्टिफिकेशन) मिली है, जिनमें से एक यह कंपनी है। इसके अलावा, 100 MVA, 220 kV स्कॉट ट्रांसफॉर्मर बनाने के लिए प्रमाणित देश की केवल दो कंपनियों में यह शामिल है। ये दोनों ट्रांसफॉर्मर भारतीय रेलवे के बिजलीकरण (इलेक्ट्रिफिकेशन) की जरूरत को पूरा करते हैं (सोर्स: केयर रिपोर्ट)।
अपनी बैकवर्ड-इंटिग्रेटेड सुविधाओं और इन-हाउस टेक्नोलॉजी की मदद से कंपनी भारत के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस की एक बड़ी रेंज ऑफर कराती है।
कंपनी मुख्य रूप से 2 बिजनेस सेगमेंट में काम करती है – ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस और EPC बिजनेस। कंपनी अपने EPC बिजनेस में ट्रांसफॉर्मर बनाने के साथ-साथ पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन का काम भी संभालती है। इससे कंपनी सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों के लिए टर्नकी प्रोजेक्ट्स पूरे कर पाती है।
कंपनी एयर-इंसुलेटेड और गैस-इंसुलेटेड सबस्टेशनों का टर्नकी इंस्टॉलेशन, 400 kV क्लास तक के मौजूदा सबस्टेशनों में बे-ऑगमेंटेशन और 132 kV, 220 kV व 400 kV की ट्रांसमिशन लाइनों का काम भी करती है।
कंपनी के EPC प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का डिजाइन, इंजीनियरिंग, खरीदारी, सप्लाई, कंस्ट्रक्शन, टेस्टिंग और चालू करने (कमीशनिंग) का काम शामिल होता है।
कंपनी को ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस का 40 साल से भी ज्यादा का अनुभव है। इस बिजनेस के तहत कंपनी अलग-अलग इंडस्ट्रीज (जैसे पावर ट्रांसमिशन, रेलवे, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर डिस्ट्रीब्यूशन) की जरूरतों के हिसाब से 5 अलग-अलग तरह के ट्रांसफॉर्मर तैयार करती है।
कंपनी की ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 के ₹276.6 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹653.83 करोड़ हो गई। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट वित्त वर्ष 2024 के ₹17.7 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹129.7 करोड़ पर पहुंच गया।
नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड और आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड इस आईपीओ के बुक रनिंग लीड मैनेजर्स हैं। एमयूएफजी इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इस इश्यू का रजिस्ट्रार है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर होगी।
