
ग्वालियर। शहर के फूलबाग क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन गोपाल मंदिर पर सुबह से मध्य रात्रि तक भक्तों का मेला लगा रहा, यहाँ विराजे राधा कृष्ण का राजसी श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा, भगवान को 120 करोड़ रुपये से ज्यादा के रत्नजड़ित बेशकीमती आभूषण पहनाए गए, जिसके बाद भगवान की छटा देखते ही बन रही थी, मंदिर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए, अनमोल गहनों की हिफाज़त के लिए पुलिस ने चारों तरफ पैनी नजर बनाये रखी।
इससे पूर्व सुबह बैंक खुलते ही गोपाल मंदिर में विराजे भगवान राधा कृष्ण के रियासतकालीन रत्न जड़ित आभूषण, सोने चांदी के गहने, चांदी के बर्तन आदि नगर निगम के अधिकारियों ने लॉकर से पूरी सुरक्षा के साथ निकाले फिर लिस्ट से उसका मिलान कर एक एक आभूषण को देखा फिर मंदिर में बैठकर उनकी गिनती की और भगवान का श्रृंगार किया। इस दौरान महापौर डॉ शोभा सिकरवार, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, निगम कमिश्नर अभिषेक चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
*हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज, मोती का श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र*
जिन आभूषणों से भगवान का श्रृंगार किया गया उनमें सोने के मुकुट, हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज, मोती और सोने-चांदी के गहने, सोने की बांसुरी आदि शामिल है। इसमें सबसे विशेष 62 असली मोतियों और 55 पन्नों वाला सात लड़ियों का प्रसिद्ध हार है जिसकी कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है, भगवान को भोग लगाने के लिए चांदी के बर्तन भी उपयोग में लाये गए।
*मेटल डिटेक्टर, ड्रोन आदि से मंदिर की सुरक्षा*
श्रृंगार के बाद भगवान की आरती की गई और उसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, नगर निगम द्वारा आयोजन की पूरी व्यवस्था की गई, पुलिस ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था सम्भाली, पुलिस ने बताया कि चूंकि भगवान को यहाँ बेशकीमती आभूषणों से सजाया गया है इसलिए दो शिफ्टों में राउंड द क्लॉक ड्यूटी दी गई। मेटल डिटेक्टर, ड्रोन आदि से निगरानी रखी गई, मंदिर रात 12 बजे तक खुला रहा। आधी रात के बाद पूरी सुरक्षा के साथ गहने बैंक लॉकर में वापस रख दिए गए।
*राधा कृष्ण का श्रृंगार देख अभिभूत हुए भक्त*
मंदिर पहुंचने वाले भक्तों में भारी उत्साह एवं श्रद्धाभाव देखने को मिला। कुछ भक्त ऐसे थे जो कई वर्षों से दर्शन के लिए आते रहे हैं उन्हें जन्माष्टमी का इन्तजार रहता है कि इस दिन भगवान को राजसी श्रृंगार में देखने का सौभाग्य मिलेगा, कुछ भक्तों ने कहा कि कान्हा को बिना श्रृंगार के देखना ही बहुत आनंद देता है लेकिन उन्हें जब विशेष रत्न जड़ित आभूषणों से सजा देखा तो नजर हटाना मुश्किल था, राधा और कृष्ण दोनों एक ही दिखाई दे रहे थे ।
*हजार साल पहले बना था गोपाल मंदिर, सिंधिया शासकों ने कराया जीर्णोद्धार*
गोपाल मंदिर ग्वालियर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है, जिसका निर्माण लगभग 1000 साल पहले हुआ था। 1921 में सिंधिया राजवंश के तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उन्होंने भगवान के श्रृंगार के लिए बेशकीमती गहने भी बनवाए थे, जिनसे हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार किया जाता है।
*किस गहने की है कितनी कीमत*
इन गहनों में 8 लाख रुपये की कीमत का सफेद मोती वाला पंचगढ़ी हार, 12-14 लाख रुपये की कीमत का सात लढ़ी हार, और 60 लाख रुपये कीमत का सोने का मुकुट शामिल है। इसके साथ ही, राधाजी का ऐतिहासिक मुकुट, जिसकी कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये है, भी भगवान के श्रृंगार में शामिल किया गया।
*भोग आराधना के लिए प्राचीन बर्तन*
भगवान के भोजन और आराधना के लिए प्राचीन चांदी के बर्तनों का उपयोग किया गया। इन बर्तनों में भगवान की समई, इत्र दान, पिचकारी, धूपदान, चलनी, सांकड़ी, छत्र, मुकुट, गिलास, कटोरी, और कुंभकरिणी जैसी वस्तुएं शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये आंकी गई है। गोपाल मंदिर की यह परंपरा ग्वालियर की धरोहर है,जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।
*पट खुलते ही जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर*
मंदिर के पट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग चुकी थीं. जैसे ही आरती के साथ पट खोले गए, पूरा परिसर “राधे-श्याम” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा. हर कोई भगवान के भव्य और आकर्षक स्वरूप की पहली झलक पाने को उत्सुक नजर आया. जिन श्रद्धालुओं को दर्शन हुए, उनके चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दे रहा था.
*भक्तों की सुविधा के लिए रहे विशेष इंतजाम*
नगर निगम और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं. मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में साफ-सफाई, रोशनी, पार्किंग और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए. दिनभर पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात रहा, ताकि दर्शन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो.
*इन्होंने कहा…*
हर वर्ष की तरह इस बार भी आभूषणों को बैंक लॉकर से सुरक्षित तरीके से निकाला गया. मंदिर समिति की मौजूदगी में प्रत्येक आभूषण का मिलान किया और सभी वस्तुएं सही स्थिति में पाई गईं. इसके बाद उन्हीं आभूषणों से राधा रानी और भगवान कृष्ण का श्रृंगार किया. दर्शन समाप्त होने के बाद सभी आभूषणों को फिर से सुरक्षित रूप से लॉकर में जमा कराया जाएगा.
— अभिषेक चौधरी, कमिश्नर, ग्वालियर निगम
