
उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि चुनाव जल्द से जल्द हों। विश्वसनीय चुनाव कराने से पहले बड़े राजनीतिक और संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में आखिरकार एक वैध और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गयी सरकार होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए पहले विश्वसनीय चुनाव की स्थितियां बनानी होंगी। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों को राजनीतिक आंदोलनों के तौर पर संगठित होने के लिए जगह, समय और संसाधनों की जरूरत है। देश में स्वतंत्र प्रेस होनी चाहिए। राष्ट्रीय निर्वाचन परिषद को व्यापक रूप से वैध माना जाना चाहिए; मतदान प्रक्रिया पर विश्वास होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को इस प्रक्रिया की निगरानी करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
उन्होंने सुश्री मारिया कोरिना मचाडो का उल्लेख करते हुए कहा कि वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता होने के नाते, वेनेज़ुएला की नागरिक होने के नाते हुए अपने देश लौटने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मानना है कि अगर वह लौटती हैं तो उन्हें किसी तरह की बदले की कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। देश से बाहर रह रहे वेनेज़ुएला के राजनीतिक नेताओं को देश के राजनीतिक भविष्य में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि देश छोड़कर गये लाखों वेनेज़ुएला के नागरिकों की भी वेनेज़ुएला के भविष्य में भूमिका होनी चाहिए, जिसमें विदेश से वोट देने का विकल्प भी शामिल हो सकता है।
अमेरिका में रह रहे वेनेज़ुएला के लोगों की स्थिति को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि कई परिवारों के सामने मुश्किलें आ रही हैं, लेकिन अमेरिका की अप्रवासन नीति खास तौर पर वेनेज़ुएला के लोगों के लिए नहीं बनाई गयी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बड़े अप्रवासन संकट को सुलझाने की कोशिश कर रहा है और हर व्यक्ति के अप्रवासन मामले का मूल्यांकन उसके कानूनी स्थिति और हालात के आधार पर किया जाना चाहिए।
श्री रुबियो ने कहा कि हाल ही में घोषित तेल समझौता वेनेज़ुएला की स्थिति सुधारने का एक अहम हिस्सा है, लेकिन यह बहुत बड़े बदलाव का सिर्फ़ एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला की भारी तेल संपदा से आखिरकार वेनेज़ुएला सरकार और उसके नागरिकों को फ़ायदा होना चाहिए, न कि राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों या विदेशी भू-राजनीतिक हितों को। अमेरिकी विदेश मंत्री ने वेनेज़ुएला के 17 तेल क्षेत्रों के विकास में अमेरिका की भागीदारी का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि इसका मकसद उत्पादन बढ़ाना, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना और यह पक्का करने के लिए सिस्टम बनाना है कि रेवेन्यू का सही हिसाब-किताब रखा जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भ्रष्टाचार और फंड के गलत इस्तेमाल को रोकने की कोशिशों के तहत केपीएमजी के ज़रिए ऑडिट करने की व्यवस्था की है।
