सीधी : सीधी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खरीफ फसलों, विशेषकर दलहन फसलें उड़द, मूंग और अरहर को भारी नुकसान पहुंचने के साथ-साथ धान की फसलों को भी नुकसान हो रहा है। विंध्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीधी के कई इलाकों में खेतों में पानी भर जाने से फसलें डूबने और सडऩे की कगार पर हैं।
जिले के वर्तमान हालात और फसलों पर इसके प्रभाव की मुख्य जिले के निचले इलाको जैसे ग्रामीण अंचलों में धान के खेतों में पानी भर जाने से पौधों की जड़ें कमजोर हो रही हैं और फसल गिरने का खतरा बढ़ गया है। सीधी सहित पूरा विंध्य क्षेत्र अरहर, उड़द और मूंग की खेती के लिए जाना जाता है। अगस्त और सितम्बर की इस लगातार बारिश से दलहनी फसलों में फफूंद जनित रोगों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि ये फसलें अत्यधिक पानी सहन नहीं कर पाती हैं।
चर्चा के दौरान कुछ किसानों का कहना था कि आरंभ में मानसून की शुरूआत सीधी जिले में काफी देरी से शुरू हुई। ऐसे में किसानों को स्वयं सिंचाई की व्यवस्था करके बोनी करने की मजबूरी निर्मित हो गई थी। अब जब फसलों की स्थिति अच्छी थी अतिवृष्टि के चलते अन्य फसलों को भी क्षति पहुंचने की संभावना निर्मित हो गई है।
निचले इलाकों में जलभराव
लगातार पानी गिरने से नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है जिससे आसपास के खेतों में जल जमाव की गंभीर स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि सामान्य बारिश फसलों के लिये लाभदायक होती है, लेकिन लगातार बारिश से निचले इलाकों के खेतों में भारी जल जमाव होने से फसल को नुकसान पहुंचता है।
सब्जी की फसलों को भी नुकसान
वर्तमान में सीधी जिले में बारिश का रूक-रूक कर दौर चल रहा है, ऐसी स्थिति में सब्जी की फसलों को भी क्षति पहुंचने की संभावना निर्मित हो गई है। सब्जी की कुछ फसलें भारी जल भराव के चलते पैदावार खो रही है। वहीं कुछ सब्जी की फसलों के गलने की संभावना भी निर्मित हो गई। काफी किसानों द्वारा शीत ऋतु की सब्जियों खेती भी की गई गई।
इनका कहना है
जिले में लगातार बारिश होने के कारण उड़द, मूंग के साथ अरहर की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचने की स्थिति निर्मित हो रही है। ऐसे समय में किसानों को संभव हो सके तो बारिश निकलने पर जल निकासी की व्यवस्था बनानी चाहिये।
आर.एस.गुप्ता, डीडीए कृषि विभाग सीधी
