मुंबई, दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के छह साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए मामले की पूरी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने परिवार द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद अब तक नियमित एफआईआर दर्ज न करने पर मुंबई पुलिस की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई और नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं।
फोरेंसिक साक्ष्यों में विरोधाभास और पुलिस की थ्योरी पर संदेह
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मेडिकल और फोरेंसिक दस्तावेजों को लेकर कई बड़ी खामियां सामने आईं। याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि इतनी अधिक ऊंचाई से गिरने के बाद शरीर पर आई चोटों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई विरोधाभास हैं, जिससे पुलिस की आत्महत्या की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बिना पुख्ता सबूत किसी को आरोपी न बनाने के निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई की नई जांच के दौरान कानूनी मर्यादाओं का पूरा पालन किया जाए। अदालत ने निर्देश दिया है कि जब तक जांच एजेंसी के पास कोई ठोस और पुख्ता सबूत हाथ नहीं लग जाते, तब तक किसी भी व्यक्ति को मीडिया या सार्वजनिक रूप से आरोपी के रूप में प्रचारित न किया जाए।

