गुवाहाटी। एआईआईएमएस गुवाहाटी में शनिवार को प्रथम AIIMS Guwahati Hip Conclave 2026 का शुभारंभ हुआ। इसका उद्घाटन एआईआईएमएस गुवाहाटी के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भूपेंद्र कुमार सिंह संजय ने किया। इस दौरान निदेशक प्रो. पुराणिक, डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, देश के प्रमुख ऑर्थोपेडिक सर्जन और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रो. डॉ. संजय ने सर्जनों से DRAFT Principle “पहली बार सही करें, क्योंकि सुधार और दोबारा सर्जरी महंगी पड़ती है” अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत केवल हिप रिप्लेसमेंट या सर्जरी ही नहीं, बल्कि हर पेशे और जीवन के लगभग हर क्षेत्र में लागू होता है। सर्जरी में इसकी अहमियत इसलिए अधिक है, क्योंकि असफल प्रक्रिया के बाद दोबारा ऑपरेशन से मरीज को अतिरिक्त दर्द, खर्च, जोखिम और लंबी रिकवरी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने हिप रिप्लेसमेंट में सही निदान, मरीज का उचित चयन, उपयुक्त इम्प्लांट, सटीक योजना, बेहतर सर्जिकल तकनीक, पुनर्वास और फॉलोअप को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम हिप की लंबी उम्र को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में संक्रमण और विशेष रूप से एसेप्टिक लूजिंग शामिल हैं।
प्रो. संजय ने बताया कि उन्होंने 98 वर्ष से लेकर 26 वर्ष तक के मरीजों का हिप रिप्लेसमेंट किया है। उन्होंने कहा कि मरीज की शारीरिक और कार्यात्मक स्थिति का उचित आकलन होने पर उम्र हिप रिप्लेसमेंट में बाधा नहीं है।
युवा सर्जनों के लिए उन्होंने BKS Key to Success
Behaviour, Knowledge and Skill का मंत्र दिया और कहा कि सफलता में व्यवहार सबसे पहले, उसके बाद ज्ञान और कौशल आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कॉन्क्लेव पूर्वोत्तर भारत में हिप सर्जरी की गुणवत्ता, शोध, नवाचार और अकादमिक सहयोग को नई दिशा देगा।
