
सलामतपुर,मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के वनगंवा में कोड़े मारे जाने और बकरों को हवा में घुमाने की एक अनूठी परंपरा है। इसके पीछे कई मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।
रायसेन जिले के वनगवा गांव में इसे बेहद अनोखे और साहसिक तरीके से मनाया जाता है। यह परंपरा “वीर बम बोले” के नाम से जानी जाती है और इसे निभाने के पीछे वीरता और साहस की परीक्षा की मान्यता है।
वनगवा गांव में यह परंपरा लगभग सौ साल पहले शुरू हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उनके पूर्वजों की परंपरा रही है, जिसे आज भी वे निभाते आ रहे हैं। इस मौके पर गांव में एक विशाल पूजा का आयोजन किया जाता है जिसमें आसपास के करीब दस गांवों के लोग इकट्ठा होते हैं।
25 फीट ऊंचे खंभे पर बकरे को बांधने की रस्म
गांव के बीचो-बीच एक 25 फीट ऊंचा लोहे का खंभा खड़ा किया जाता है। सबसे पहले मेघनाथ की पूजा की जाती है और फिर वीर बब्बो के जयकारे लगाए जाते हैं। इसके बाद एक बकरे को लाकर उसे खंभे के ऊपर बांधा जाता है। बकरे को हवा में ऊपर घुमाने की रस्म भी होती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग इकट्ठा होते हैं।
लोगों को कोड़े मारने की परंपरा–
इस अनोखी परंपरा में गांव के वीरों की पहचान करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है। खंभों से बंधी रस्सियों में लोगों को बांधा जाता है और फिर उन्हें रस्सियों से झूलाया जाता है। इसके बाद, रस्सियों से झूलने वाले लोगों को पूरी ताकत से कोड़े मारे जाते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को वीरता और साहस का एहसास कराया जाता है। यह एक तरह की परीक्षा मानी जाती है जो उन्हें समाज और गांव की रक्षा के लिए तैयार करती है।
अनोखी परंपरा के पीछे की मान्यता–
वनगवा गांव की यह परंपरा दर्शाती है कि लोक संस्कृति और परंपराएं समय के साथ कैसे जीवित रहती हैं।
इनका कहना है।
“10 गांवों के लोग होते हैं शामिल”
इस परंपरा में सिर्फ वनगवा गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब दस गांवों के लोग भी शामिल होते हैं। वे बताते हैं कि उनके बुजुर्ग भी इस परंपरा में हिस्सा लेते थे और अब वे लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कैलाश नामदेव, स्थानीय रहवासी वनगवा।
