सतना : रक्षा बंधन के पर्व पर केंद्रीय जेल सतना सहित 10 जेलों में गहमा-गहमी और उल्लास छाया नजर आया. इस दौरान जेल में निरुद्ध कुल 1829 बंदियों ने 5 हजार 93 परिजनों और 1 हजार 322 बच्चों से मुलाकात की. दिन भर छाए रहे पर्व के उल्लास के बीच कई बंदियों और उनके परिजनों की आंखें भी छलक आईं.रक्षा बंधन के अवसर पर केंद्रीय जेल सहित सर्किल में सुबह-सुबह ही कुल 2853 बंदियों के लॉकअप को खोल दिया गया. रक्षाबंधन के अवसर पर परिजनों के जेल में पहुंचने और त्योहार मनाने में किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए जेल प्रशासन द्वारा टेंट लगवाए जाने के साथ ही पूजा की थाली भी उनलब्ध कराई गई थी.
थाली में हल्दी चावल सिंदूर सहित अन्य सामग्री की व्यवस्था जेल प्रशासन द्वारा की गई थी. जेल अधीक्षक श्रीमती लीना कोष्टा ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्धारित अवधि में केंद्रय जेल सहित सर्किल में कुल 1829 बंदियों ने अपने-अपने परिजनों से मुलाकात करते हुए रक्षाबंधन का त्योहार मनाया. केंद्रीय जेल सतना में कुल 993 पुरुष और 19 महिला बंदियों ने परिजनों से मुलाकात की. वहीं खुली जेल सतना में एक महिला से मुलाकात करने के लिए उनका एक भाई पहुंचा था. जबकि सर्किल के अंतर्गत उप जेल छतरपुर में 298 बंदियों से मुलाकात करने के लिए 758 परिजन और 262 बच्चे पहुंचे.
वहीं पन्ना उप जेल में 135 बंदियों से 440 परिजन व 173 बच्चों ने मुलाकात की. उप जेल मैहर में 103 बंदियों से 410 परिजनों व 102 बच्चों ने मुलाकात की. उप जेल नागौद में 69 बंदियों से 231 परिजनों और 114 बच्चों ने मुलाकात की. उप जेल नौगांव में 33 बंदियों से 97 परिजनों व 40 बच्चों ने मुलाकात की. उप जेल बिजावर में 70 बंदियों से 221 परिजनों व 124 बच्चों ने मुलाकात की. उप जेल लवकुश नगर में 53 बंदियों ने 126 परिजनों व 46 बच्चों से मुलाकात की. और उपजेल पवई में 55 बंदियों ने 261 परिजनों व 61 बच्चों से मुलाकात की. इस जिहाज से केंद्रय जेल सहित सर्किल जेलों में कुल 1829 बंदियों ने 5 हजार 93 परिजनों और 1382 बच्चों से मुलाकात की.
वर्तमान व पूर्व महापौर भी पहुंचे
महापौर योगेश कुमार ताम्रकार और पूर्व महापौर ममता पाण्डेय भी रक्षाबंधन के असवर पर केंद्रीय जेल पहुंचे. ऐसी महिला बंदी जिनके भाई मुलाकात करने नहीं पहुंच सके थे, उनसे महापौर ने राखी बंधवाई. वहीं ऐसे बंदी जिनकी बहनें नहीं पहुंच पाई थीं, उन्हें पूर्व महापौर द्वारा राखी बांधी गई. रक्षाबंधन के अवसर पर एक ओर जहां जेलों में उल्लास छाया रहा वहीं विदाई के दौरान अधिकांश परिजनों की आंखें भर आईं. जिसे देख कर बंदी भी स्वयं को नहीं रोक सके और भावुक हो गए. इसी कड़ी में मुलाकात करने जेल में पहुंचे परिजनों में से एक बहू ने अपने बेटे को ससुर की गोद में रखते हुए उनके पैरों में गिर पड़ी. पोते को गोद में देखकर आर्शिवाद देने के दौरान बंदी की न सिर्फ आंखे छलक गईं बल्कि वे फफक भी पड़े.
