
वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारियों की ओर से सुझाव दिया गया कि आरआरबी इस सह-ऋण सुविधा के माध्यम से एमएसएमई को कर्ज प्रदान करने को शाखाओं के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाएं।
आयोजन की अध्यक्षता वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया की अध्यक्षता की। सम्मेलन में सिडबी के मुख्य कार्यकारी निदेशक मनोज मित्तल, वित्तीय सेवा विभाग और सिडबी तथा नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी और सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्ष उपस्थित थे।
डीएफएस सचिव मित्तल ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई को क्रेडिट तक पहुंच को प्रोत्साहन देने के महत्व पर बल दिया। सिडबी के सीएमडी ने भी आरआरबी से इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए आगे आने का आग्रह किया सिडबी की ओर से विकसित सह-ऋण मंच एक संपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो कर्ज सुविधा देने की प्रक्रिया को तेज और कागज से मुक्त बनाता है, जिसके चलते लोन की त्वरित स्वीकृति और वितरण होता है। आवेदन पोर्टल के माध्यम से सभी विवरण प्रदान करने के बाद, लोन आवेदकों को बहुत कम समय में उनके सैद्धांतिक मंजूरी की सूचना दी जाती है।