एक दशक पहले जब भारत में एकीकृत भुगतान इंटरफेस यानी यूपीआई की शुरुआत हुई थी, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यह व्यवस्था देश के आर्थिक व्यवहार की तस्वीर इतनी तेजी से बदल देगी. आज यूपीआई केवल भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत के डिजिटल परिवर्तन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की एक सफल मिसाल बन चुका है. दस वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री समेत देश के अनेक नेताओं ने इसे भारत की बड़ी उपलब्धि बताया है, जो बिल्कुल स्वाभाविक है. प्रधानमंत्री मोदी ने यूपीआई की शुरुआत को भारत के डिजिटल भुगतान के सफर में बड़ा मोड़ बताया है. वास्तव में यह उनकी उस सोच का परिणाम है, जिसमें तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन को सरल और सशक्त बनाने का माध्यम माना गया. डिजिटल इंडिया अभियान के पीछे यही मूल दृष्टि थी कि तकनीक की सुविधा देश के बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के छोटे दुकानदार, किसान, मजदूर, युवा, महिला और सामान्य उपभोक्ता तक पहुंचे. यूपीआई ने इस सोच को जमीन पर उतारने का काम किया है. आज चाय की छोटी दुकान से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठान तक भुगतान के लिए यूपीआई स्वीकार किया जा रहा है. जेब में नकदी रखने, खुले पैसे की चिंता करने या बैंकिंग प्रक्रिया की जटिलताओं से गुजरने के बजाय मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही क्षणों में भुगतान संभव है. यही वह बदलाव है जिसने डिजिटल भुगतान को आम भारतीय के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बना दिया है.
यूपीआई की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है. डिजिटल तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह आम आदमी के लिए सहज हो. प्रधानमंत्री मोदी की नीति-निर्माण की विशेषता यही रही है कि उन्होंने तकनीक और जनसामान्य की जरूरत के बीच की दूरी कम करने पर जोर दिया. जनधन खातों, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति के साथ यूपीआई ने डिजिटल वित्तीय समावेशन को नई गति दी है.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ठीक ही कहा है कि यूपीआई परिवर्तनकारी बदलाव के एक दशक की कहानी है. यह केवल तेज और सुरक्षित लेन-देन की सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की ताकत का प्रमाण है. संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि यूपीआई ने दुनिया को भारत की डिजिटल क्षमता का एहसास कराया है. आज अनेक देश भारत के यूपीआई मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं. यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में केवल विदेशी तकनीक का अनुकरण नहीं किया, बल्कि अपनी जरूरतों और विशाल जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए एक प्रभावी व्यवस्था विकसित की.यूपीआई के दस वर्ष पूरे होना इसलिए केवल एक तकनीकी उपलब्धि का उत्सव नहीं है. यह उस दूरदृष्टि की सफलता का प्रमाण है, जिसने डिजिटल तकनीक को भारत के विकास और जनसशक्तीकरण का माध्यम बनाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने जिस यात्रा की शुरुआत की थी, यूपीआई उसका सबसे चमकदार पड़ाव है. आने वाले वर्षों में यह व्यवस्था भारत को न केवल अधिक डिजिटल, बल्कि अधिक पारदर्शी, समावेशी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
