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उमरिया, उमरिया के बढ़छड़ से कटनी-मैहर के नाम पर कटती है टीपी, दिनभर उसी कागज़ पर होता है काला कारोबार
कटनी। बरही क्षेत्र में रेत के अवैध कारोबार को अंजाम देने के लिए खनन माफिया अब अंतरजिला सीमाओं का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का नया पैटर्न चला रहे हैं। कटनी और उमरिया जिले की सीमा पर बसे अमरपुर चौकी रोड के सिद्ध महाराज घाट (मुरुगुड़ी), जाजागढ़, बिचपुरा और कनौर क्षेत्र से आधी रात के सन्नाटे में रेत का बड़ा खेल चल रहा है।
आधी रात डंपिंग, दिन में ‘लीगल’ सप्लाई
सूत्रों के अनुसार, रात 12 बजे के बाद जजागढ़, बिचपुरा और कनौर की नदियों से बेधड़क ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए रेत निकाली जाती है। इस अवैध रेत को बरही और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गुप्त ठिकानों पर छिपाकर (डंप) रख दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है कागजी हेरफेर का असली खेल।
बढ़छड़ की टीपी और कटनी-मैहर का खेल
उमरिया जिले के ग्राम बढ़छड़ से रेत परिवहन की टीपी (ट्रांजिट पास) जारी कराई जाती है। इस टीपी में गंतव्य स्थान के रूप में कटनी या मैहर दर्ज होता है। माफिया इसी एक वैध टीपी की आड़ में दिनभर अपनी अवैध रूप से डंप की गई रेत की डिलीवरी स्थानीय बाजारों और ग्राहकों को करते रहते हैं।
एक टीपी, दर्जनों चक्कर
नियमों को ताक पर रखकर एक ही टीपी का इस्तेमाल पूरा दिन बार-बार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को निकालने में किया जाता है। यदि रास्ते में कोई जांच टीम रोकती भी है, तो वही एक टीपी दिखाकर वाहन को वैध साबित कर दिया जाता है। इस तरह प्रशासन और खनिज विभाग की आंखों में धूल झोंककर राजस्व को रोज लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही है।
सीमावर्ती क्षेत्र बना माफिया की ढाल
दो जिलों (कटनी और उमरिया) की सीमा होने का फायदा भी माफिया को बखूबी मिल रहा है। कटनी प्रशासन की कार्रवाई की सुगबुगाहट होते ही वाहन उमरिया सीमा में दाखिल हो जाते हैं और उमरिया की सख्ती पर कटनी की तरफ रुख कर लेते हैं।
