जबलपुर: खरीफ मौसम में जहां अधिकांश किसान धान की खेती को प्राथमिकता देते हैं, वहीं विकासखंड शहपुरा के ग्राम भीटा के किसान हल्कू बर्मन ने अपने खेत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए नवाचार कर मछली पालन के साथ सिंगाड़े की खेती को अपनाकर अनोखी मिसाल पेश की है।हल्कू बर्मन कृषि अधिकारियों की समझाइश पर पिछले कुछ वर्षों से खरीफ मौसम में कृषि भूमि के उस हिस्से में धान के स्थान पर सिंघाड़े की खेती के साथ मछली पालन कर रहे हैं, जहाँ हार्वेस्टर जैसी मशीनों की पहुंच संभव नहीं है। इस नवाचार से उसे अपने छोटे रकबे का बेहतर उपयोग करने के साथ-साथ पहले की तुलना में अधिक आय अर्जित करने में सफलता मिली है।
हल्कू बर्मन के पास लगभग तीन एकड़ सिकमी की जमीन है। इसमें से 0.25 एकड़ छोटे रकबे में हार्वेस्टर के पहुंचने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण धान की कटाई एक बड़ी समस्या थी। धान की कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता के कारण समय और लागत दोनों बढ़ते थे। इसी समस्या को देखते हुए किसान ने खेत के इस हिस्से में कुछ वर्ष पहले धान के विकल्प के रूप में सिंघाड़े की खेती के साथ मछली पालन शुरू किया। शेष रकबे में रबी में मटर एवं सब्जियों की तथा गर्मियों में उड़द की खेती करते हैं। इससे उन्हें खर्च काटकर सालाना लगभग चार लाख रूपये तक की आय प्राप्त होती है। फसल विविधीकरण के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं एवं बाय प्रोडक्ट जैसे गोबर और गौ मूत्र का प्रयोग खाद के रूप में कृषि में करते हैं। जिससे उन्हें मुख्य उत्पाद के साथ साथ बाय प्रोडक्ट का भी लाभ मिलता है जो इसे एकीकृत कृषि प्रणाली से जोड़ता है।
एक ही खेत से दोहरा उत्पादन
खेत के छोटे से हिस्से में सिंघाड़े की खेती के साथ मछली पालन करने से हल्कू बर्मन को एक ही रकबे से दो अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। पानी में सिंघाड़े के पौधों की वृद्धि के साथ उसी जलक्षेत्र में उपयुक्त प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा सकता है। इससे उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग होता है और किसान की आय के स्रोतों में विविधता आती है। कृषि अधिकारियों के अवलोकन के दौरान ग्राम के अन्य किसान गोलू तिवारी ग्राम भीटा, महेंद्र पाल ग्राम फुलर, पुरनसिंह ग्राम भीटा भी मौजूद थे।
