कौन हैं भवानी देवी? तलवारबाजी में रचा इतिहास, ओलंपिक में पहुंचने वाली पहली भारतीय फेंसर की प्रेरणादायक कहानी

नयी दिल्ली, भवानी देवी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज हैं। जानिए उनकी कड़ी मेहनत, उपलब्धियों और प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।

तलवारबाजी कभी युद्ध के मैदान में दुश्मन को हराने के लिए सीखी जाने वाली कला थी। समय के साथ युद्ध का तरीका बदला और तलवारबाजी ने खेल का रूप ले लिया। आज यह दुनिया के प्रमुख खेलों में शामिल है। भारत में इस खेल को नई पहचान दिलाने में सीए भवानी देवी का बड़ा योगदान है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर भारतीय तलवारबाजी को दुनिया के सामने पहचान दिलाई है।

कौन है भवानी देवी?
27 अगस्त 1993 को चेन्नई में जन्मीं भवानी देवी का पूरा नाम चदलवाड़ा आनंदा भवानी देवी है। उन्होंने सिर्फ 11 साल की उम्र में साल 2004 में तलवारबाजी शुरू की थी। दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह केरल के थालास्सेरी स्थित साई केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने इस खेल की बारीकियां सीखीं।

भवानी देवी ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रख दिया था। 14 साल की उम्र में उन्होंने तुर्की में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और तलवारबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई।

जूनियर स्तर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भवानी ने साल 2014 की एशियन अंडर-23 चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीता। इसके बाद उनके करियर में कई बड़ी उपलब्धियां जुड़ती चली गईं।

कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
भवानी देवी ने 2018 में केनबरा में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 2022 में लंदन में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साल 2023 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की।

उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना शामिल है। भवानी देवी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज बनीं। उन्होंने 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और इस खेल में देश के लिए एक नया इतिहास बनाया।

पहली भारतीय तलवारबाज बनीं
भवानी देवी ने एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तलवारबाज बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके अलावा कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में उनके नाम दो स्वर्ण पदक हैं।तलवारबाजी में उनके शानदार योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके खेल करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

33 साल की उम्र में भी नहीं रुकी
33 साल की उम्र में भी भवानी देवी खेल से जुड़ी हुई हैं और लगातार देश के लिए पदक जीतने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने साबित किया है कि सही मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी खेल में दुनिया के बड़े खिलाड़ियों को चुनौती दी जा सकती है। भारतीय तलवारबाजी के इतिहास में भवानी देवी का नाम हमेशा एक प्रेरणा के रूप में याद किया जाएगा।

Next Post

पहली फिल्म हुई बुरी तरह फ्लॉप, लोगों ने बनाई दूरी, फिर चांदनी बार ने बदल दी मधुर भंडारकर की किस्मत

Wed Aug 26 , 2026
मुंबई, मधुर भंडारकर ने आर्थिक तंगी के कारण छठी कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी और सिग्नल पर च्युइंग गम बेची। कैसेट स्टोर में काम करते हुए उन्होंने 1700 कैसेट जुटाए और फिल्ममेकिंग सीखी। बॉलीवुड में अपनी अलग तरह की कहानियों और समाज की हकीकत को पर्दे पर उतारने के लिए मशहूर […]

You May Like