ग्वालियर की सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, अब तीन सड़कों का होगा तकनीकी एक्स-रे

ग्वालियर। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच को और तकनीकी आधार देने के निर्देश दिए। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की पीठ ने सड़क से नमूने लेने की लंबी प्रक्रिया और उससे जुड़े विवादों को देखते हुए जांच के लिए निर्धारित सड़कों की संख्या आठ से घटाकर चार कर दी है। इनमें एक ऐसी सड़क भी शामिल रहेगी, जहां से पहले ही नमूना लिया जा चुका है, ताकि नगर निगम के सड़क निर्माण कार्य की सामान्य कार्यप्रणाली का आकलन किया जा सके। सभी पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट ने यह व्यवस्था तय की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा गठित आयोग की ओर से बताया गया कि हनुमान चौराहा से गुड़ा-गुड़ी का नाका तक सड़क से नमूने लिए गए हैं। निरीक्षण टीम मौके पर पहुंची तो एक गड्ढा पहले से खुला हुआ मिला। नगर निगम ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि यह गड्ढा पूर्व निर्धारित हनुमान चौराहा गुड़ा गुड़ी का नाका मार्ग का हिस्सा नहीं है, इसलिए यहां से नमूना नहीं लिया जाना चाहिए। आयोग ने आपत्ति स्वीकार नहीं की और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। आयोग ने यह भी बताया कि निर्धारित मार्ग से नमूने लेने की प्रक्रिया में करीब 11 घंटे लगे। सुनवाई में यह भी सामने आया कि कुछ सड़कों की तस्वीरें दो दिन पहले ही ली गई हैं और आगे 30 अगस्त, 3 सितंबर तथा 6 सितंबर को नमूने और तकनीकी जांच की प्रक्रिया प्रस्तावित है।

कोर्ट ने कहा कि नमूने लेने की प्रक्रिया में आयोग और पक्षकारों के अधिवक्ताओं ने काफी समय और श्रम लगाया है। इसी को देखते हुए आठ सड़कों के बजाय प्रत्येक संबंधित विभाग की एक-एक सड़क की जांच कराने का निर्णय लिया गया। अब नगर निगम ग्वालियर, लोक निर्माण विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से एक-एक सड़क का चयन कर उसकी तकनीकी जांच की जाएगी। खास बात यह है कि नगर निगम द्वारा पूर्व में उन सड़कों में से एक पर बिना कोर्ट की अनुमति निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश किए जाने को देखते हुए कोर्ट ने जांच की प्रक्रिया को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती है।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आयोग के अध्यक्ष जांच के लिए चुनी गई सड़कों का विवरण हाईकोर्ट परिसर से रवाना होने से महज आधा घंटा पहले बताएंगे। पूर्व आदेश में चिन्हित सड़कों का विवरण कोर्ट ने वापस ले लिया था, लेकिन विवाद को समाप्त करने के लिए आयोग को पूर्व में शॉर्टलिस्ट की गई सात सड़कों में से किसी तीन सड़कों का चयन करने की स्वतंत्रता दी गई है। इससे जांच के लिए पहले से सड़क तैयार करने या उसमें किसी प्रकार का बदलाव करने की संभावना को रोकने की कोशिश की गई है।

सुनवाई में एनएचएआई की ओर से अधिवक्ता आशीष सारस्वत ने नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) से सड़क की जांच कराने का प्रस्ताव रखा। बताया गया कि एनएसवी तकनीक के जरिए सड़क को खोदे बिना उसके भीतर की स्थिति का तकनीकी ‘एक्स-रे’ प्राप्त किया जा सकता है। कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए एनएचएआई को अपने खर्च पर एनएसवी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अब 30 अगस्त को नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की एक-एक चयनित सड़क को एनएसवी के माध्यम से स्कैन किया जाएगा। यदि आयोग को आवश्यक लगा तो 3 और 6 सितंबर को नगर निगम तथा पीडब्ल्यूडी की सड़कों से भौतिक नमूने भी लिए जा सकेंगे। एनएचएआई की सड़क से भौतिक नमूना लिया जाना है या नहीं, इस पर निर्णय बाद में होगा। कोर्ट ने आयोग को जरूरत पड़ने पर नमूने जुटाने की अन्य तकनीकी विधियां अपनाने की भी स्वतंत्रता दी है।

कोर्ट ने पहले से निर्धारित प्रक्रिया को भी आगे जारी रखा है। 30 अगस्त, 3 सितंबर और 6 सितंबर को लिए जाने वाले नमूनों में से दो नमूने पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना टेस्टिंग लैब को दिए जाएंगे, एक नमूना जिला न्यायालय ग्वालियर के मालखाने में सुरक्षित जमा रहेगा और एक नमूना नगर निगम को सौंपा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और नमूनों की सुरक्षित कस्टडी सुनिश्चित करना है।

*गुणवत्ता और जवाबदेही पर बेहद कड़ा रुख अपनाया*

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का मूल मुद्दा ग्वालियर की खराब सड़कों की स्थिति है। किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की सिविल अथवा आपराधिक जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय की जा सकेगी। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि नगर निगम आयुक्त ने नमूने लिए जाने से पहले ही सड़क की अत्यंत खराब स्थिति को देखते हुए उसके पुनर्निर्माण का निर्णय लिया था। हालांकि कोर्ट ने सड़क निर्माण की अनुमति देते हुए गुणवत्ता और जवाबदेही पर बेहद कड़ा रुख अपनाया।

*वास्तविक रूप से किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन करना होगा*

हाईकोर्ट ने कहा कि ग्वालियर की जनता को सुचारु और गुणवत्तापूर्ण सड़कें मिलना उनका अधिकार है। नगर निगम को 8 नवंबर 2025 को नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा जारी एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट्स) के निर्धारित मानकों के अनुसार सड़क निर्माण करने की अनुमति दी गई है। लेकिन हर मेजरमेंट बुक पर नगर निगम आयुक्त को स्वयं हस्ताक्षर करने होंगे और उससे पहले मौके पर जाकर दर्ज माप तथा वास्तविक रूप से किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन करना होगा। यदि मेजरमेंट बुक में दर्ज माप और ठेकेदार द्वारा वास्तव में किए गए कार्य में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अन्य अधिकारियों के साथ नगर निगम आयुक्त को भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

कोर्ट ने शहर की अन्य खराब सड़कों को लेकर भी निगम को स्पष्ट संदेश दिया कि इस जनहित याचिका की लंबित स्थिति को सड़क निर्माण नहीं करने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। हालांकि अन्य सड़कों के निर्माण के लिए नगर निगम को कोर्ट की अनुमति लेनी होगी। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्षतिग्रस्त सड़कों पर पैचवर्क या मरम्मत के लिए भी क्या कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका का प्राथमिक उद्देश्य ग्वालियर वासियों को सुचारु और उचित रूप से निर्मित सड़कें उपलब्ध कराना है।

*विस्तृत परियोजना रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश*

इसी क्रम में हाईकोर्ट ने नगर निगम ग्वालियर को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में नई सड़कों के निर्माण के साथ-साथ क्षतिग्रस्त सड़कों के पैचवर्क और मरम्मत का पूरा विवरण देना होगा। कोर्ट ने बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि डीपीआर दाखिल नहीं की जाती है तो यह माना जाएगा कि नगर निगम सड़कों का उचित निर्माण करने में रुचि नहीं रखता और उसने ग्वालियर की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।

अब 30 अगस्त ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण दिन होगा। उस दिन एनएसव्ही के जरिए नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की एक-एक सड़क की तकनीकी स्कैनिंग होगी। जरूरत पड़ने पर 3 और 6 सितंबर को भौतिक नमूने भी लिए जाएंगे। नमूनों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ या नहीं और कहीं निर्माण में तकनीकी अथवा वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

Next Post

उम्मीद बंधाकर लौट गए बादल, तेज बारिश को तरसे

Tue Aug 25 , 2026
शाजापुर, नगर का मौसम एक बार फिर बदला लेकिन फोरी राहत देकर फिर नगरवासियों के हिस्से निराशा आई. मंगलवार को नगर में दिनभर बारिश का मौसम तो बना रहा, लेकिन नगरवासियों के हिस्से केवल रिमझिम वर्षा ही आई. जबकि आसमान पर काले बादल भी छाए लेकिन तेज बारिश की आस […]

You May Like