अज़हर खान
जबलपुर: बरगी बांध की जो लहरें कभी सैलानियों को सुकून का अहसास कराती थीं, वे आज अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए उम्र भर का नासूर बन चुकी हैं। 30 अप्रैल 2026 की वो शाम ऐसी ही थी, जहाँ खुशियों का शोर, चंद मिनटों में मौत के सन्नाटे में बदल गया था कुदरती लहरों के कहर और जिम्मेदारों की घोर लापरवाही ने 13 जिंदगियाँ लील ली थीं। यह हादसा सिर्फ प्राकृतिक तूफान का नतीजा नहीं था, बल्कि सुरक्षा जैकेटों की उपलब्धता और मौसम के अलर्ट को नजरअंदाज करने जैसी एक बहुत बड़ी लापरवाही भी थी। इस खौफनाक, रूह कंपा देने वाले हादसे को तीन महीने 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पीडि़त परिवारों के जख्म आज भी ताजे हैं और उनकी आँखें सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही हैं हमारे अपनों का कसूर क्या था, हमें इंसाफ कब मिलेगा? सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर 13 लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाले गुनहगार और कब तक खुले आम घूमेंगे। इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी वह सलाखों के पीछे क्यों नहीं गए हैं? इतना समय बीत गया है और जांच अधूरी है, ऐसे में गुनहगारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू होने में कितना वक्त लगेगा, मुकदमा चलने और उन्हें सजा मिलने में कितने साल लगेंगे?
दरअसल हादसे के बाद 26 मई 2026 को मामले की न्यायिक जांच विधिवत शुरू की गई थी। उम्मीद थी कि पीडि़तों को जल्द न्याय मिलेगा, लेकिन अब भी जांच अधूरी है। मानसून के कारण जंाच में देरी होने का दावा करते हुए अब जांच आयोग ने अधूरी जांच को पूरा करने और रिपोर्ट तैयार करने के लिए शासन से दो माह की अतिरिक्त समयावधि मांगी है। हादसे की कडिय़ों को पूरी तरह जोडऩे और सुरक्षा मानकों को परखने, प्रदेश के वॉटर एक्टिविटीज स्थलों में पर्यटकों की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्या तैयारी है समेत अन्य बिन्दुओं पर खोजबीन बाकी है। ऐसे में जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके लिए हर दिन कैसे बीत रहा है इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। संभवत: दो माह बाद आयोग द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद उस पर एक्शन राज्य सरकार लेगी। अब देखना यह है कि जब यह रिपोर्ट आएगी तब सरकार इन गुनहगारों और लापरवाह अधिकारियों पर कैसा हंटर चलाती है, रिपोर्ट पर एक्शन क्या होता है।
प्रदेश के 14 जगहों पर होना है सुरक्षा का फिजिकल टेस्ट, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे: सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने नवभारत से चर्चा के दौरान कहा कि हादसे से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं, हालांकि जांच पूरी नहीं हो पाई है, रिपोर्ट लिखी जा रही है जो भी इस हादसे के लिए वास्तव में जिम्मेदार पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मानसून और भारी बारिश की वजह से जांच में देरी हुई है। अभी कई महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच और घटनास्थलों का भौतिक सत्यापन होना बाकी है। शासन से दो माह की अतिरिक्त समयावधि और मांगी गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे मध्य प्रदेश में कुल 14 जगहों पर क्रूज का संचालन किया जाता है। आयोग इन सभी क्षेत्रों और वॉटर एक्टिविटीज स्थलों का खुद जाकर फिजिकल इंस्पेक्शन करेगा। बारीकी से मुआयना करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस हादसे के कौन-कौन जिम्मेदार हैं इस बात का वह अपनी रिपोर्ट में उल्लेख करेंगे। दर्दनाक हादसे के असली जिम्मेदारों पर एक्शन लेने सरकार से अनुशंसा करेंगे। उल्लेखनीय हो कि 10 मई को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया था। उन्होंने 26 मई को कार्यभार ग्रहण करते ही आयोग के कार्यों को अंजाम देना प्रारंभ कर दिया था।
ये हैं जांच के बिन्दु
जिन पांच बिन्दुओं पर जांच चल रही है उसमें दुर्घटना के कारण, उत्तरदायित्व का निर्धारण करना, दुर्घटना के दौरान और बाद में किए गए बचाव उपायों की पर्याप्तता और राहत कार्यों की समीक्षा, राज्य में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज एवं जल क्रीड़ा गतिविधियों का ऑडिट, इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 एवं एनडीएमए बोट सेफ्टी गाइडलाइंस, 2017 के अनुरुप जलयानों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था समेत राज्य में क्रूज, नौकाओं एवं जल क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन व रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करना, ऐसे सभी स्थानों पर जहां नागरिक जल परिवहन, नौका, क्रूज एवं जल क्रीड़ा गतिविधियां संचालित हो रही हैं, त्वरित प्रतिक्रिया दल के गठन की व्यवस्था शामिल हैं।
ये भी है आरोप-
आरोप है कि गैरजिम्मेदाराना तरीके से क्रूज संचालन हुआ। आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और क्लियरेंस उपलब्ध नहीं थे। अनियमितताओं और सबूत मिटाने क्रेज डिस्मेंटल किया गया था। जलाशयों में केवल फोर-स्ट्रोक इंजन वाली नावों को संचालन की अनुमति है, जबकि संबंधित क्रूज़ कथित तौर पर दो पुराने डीजल इंजनों से संचालित किया जा रहा था। एक इंजन पहले से खराब था। क्रूज का पिछले पांच वर्षों से कोई अधिकृत सर्वे नहीं कराया गया था और बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के उसका संचालन जारी था। 29 अप्रैल को खराब मौसम का अलर्ट जारी हुआ था इसके बावजूद क्रूज संचालन हुआ। लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गईं थीं। नाव में पानी भरने के बाद लाइफ जैकेट बांटी गई थीं।
