इंदौर: शहर के चौराहों पर यातायात नियमों की निगरानी कर रही तीसरी आंख की मौजूदगी के बावजूद नियम तोड़ने वालों में खौफ नजर नहीं आ रहा. आईटीएमएस के 32 महीने के आंकड़े इसकी तस्वीर साफ करते हैं. कैमरों ने 20 लाख 11 हजार 718 चालान बनाए, लेकिन इनमें से 53 करोड़ 93 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना अब भी वसूल नहीं हो पाया है.23 नवंबर 2023 से शुरू हुई कैमरा आधारित चालानी व्यवस्था में 28 प्रमुख चौराहे शामिल हैं.
इस दौरान कैमरों ने औसतन रोज करीब 2 हजार चालान रिकॉर्ड किए. यानी हर दिन बड़ी संख्या में वाहन चालक रेड लाइट, हेलमेट, रॉन्ग साइड और अन्य नियमों का उल्लंघन करते कैमरों में कैद हुए. आंकड़ों का दूसरा पहलू और ज्यादा गंभीर है. 20 लाख से ज्यादा चालानों के मुकाबले अब तक 10 करोड़ 74 लाख 75 हजार 380 रुपए ही जमा हुए हैं. इसके विपरीत 53 करोड़ 93 लाख 34 हजार 400 रुपए की राशि अभी बकाया है. यानी चालान बनाने की रफ्तार और जुर्माना वसूलने की व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है.
अमानक नंबर प्लेट भी कैमरे की नजर में…
आईटीएमएस कैमरों से अब बिना हेलमेट, तीन सवारी, रेड लाइट जंप और रॉन्ग साइड के साथ अमानक नंबर प्लेट के चालान भी बनाए जा रहे हैं. एलआईजी, रसोमा, स्कीम नंबर 78, पलासिया, गीता भवन, नवलखा और बॉम्बे हॉस्पिटल सहित 28 चौराहों पर चालानी कैमरे काम कर रहे हैं. इनके अलावा 65 कैमरे अलग अलग स्थानों पर रिकॉर्डिंग के लिए लगाए हैं.
चालान तो बन रहे, लेकिन जमा नहीं हो रही राशि
कैमरे चालान तो बना रहे हैं, लेकिन जुर्माना जमा कराने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह ऑनलाइन नहीं है. फिलहाल चालान यातायात थाने या चौराहों पर पीओएस मशीन के जरिए जमा किए जा सकते हैं. समय पर भुगतान नहीं होने पर कई चालान कोर्ट पहुंच जाते हैं. चालान भुगतान को इंदौर ट्रैफिक साथी ऐप से जोड़ने की तैयारी है. अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की जा सकती है.
