तेहरान, 15 अगस्त (वार्ता) ईरान ने यमन को अस्थिर करने के अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि तेहरान से सना के लिए संचालित हाल की उड़ानें पूरी तरह मानवीय उद्देश्य से थीं और उनका कोई सैन्य मकसद नहीं था।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि गुलामहुसैन दारजी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि इन उड़ानों का उद्देश्य सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लंबे समय से बंद रहने और उस पर लगाये गये प्रतिबंधों से प्रभावित यमनी लोगों की मदद करना था। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने पत्र के हवाले से यह जानकारी दी।
श्री दारजी ने पत्र में अमेरिका पर सुरक्षा परिषद को गुमराह करने और यमन में अपनी गतिविधियों से ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण लाखों यमनी लोगों को जरूरी यात्रा, चिकित्सा उपचार, शिक्षा और मानवीय सहायता से वंचित होना पड़ा है।
ईरान ने यमन में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में समावेशी और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया का भी समर्थन किया। उसने कहा कि स्थायी शांति केवल सैन्य दबाव या संघर्ष बढ़ाने से हासिल नहीं की जा सकती।
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही लंबे समय से अदन स्थित सऊदी समर्थित यमनी सरकार के साथ संघर्ष में हैं। हाल के सप्ताहों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है और सऊदी जहाजों के लिए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते को रोकने की कोशिश की है।
इस बीच, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका पर पश्चिम एशिया में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। श्री अजीजी ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका को क्षेत्र से निश्चित रूप से बाहर निकल जाना चाहिए और अपनी वापसी की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि आत्मसमर्पण, विभाजन और सत्ता परिवर्तन की अमेरिकी नीति को लोकप्रिय प्रतिरोध, दृढ़ता और सशस्त्र बलों की क्षमता ने विफल कर दिया है।
श्री अजीजी ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी से सुरक्षा के बजाय अस्थिरता और असुरक्षा बढ़ती है।
