होर्मुज संकट के चलते जहाजों की आवाजाही ठप होने और कच्चे तेल के दाम बढ़ने से दुनिया भर में मंदी आने की कगार पर है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की चिंता भी बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है। यूएई ने अपने तेल जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनातनी बहुत अधिक बढ़ गई है।
इस बीच अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को अनिश्चित काल तक जारी रखने की घोषणा की है, जिससे पूरे तेल बाजार में मंदी का खतरा बढ़ गया है। वहीं ईरान की संसद ने दुश्मन देशों के जहाजों पर कड़ा प्रतिबंध लगाने वाली योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे संकट और अधिक गहरा गया है।
जहाजों की आवाजाही ठप
शिप ट्रैकिंग कंपनी क्प्लर के अनुसार शुक्रवार को इस मार्ग से केवल दो ही जहाज गुजरे और इनमें एक भी तेल टैंकर शामिल नहीं था। गुरुवार को यहां से नौ और बुधवार को पांच जहाज गुजरे थे, जो कि अगस्त के औसत बारह जहाजों से कम हैं। युद्ध से पहले यहां से रोज 130 से अधिक जहाज गुजरते थे।
सैनिक और आर्थिक दबाव
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि उनकी नौसेना जहाजों को बदल-बदल कर इस नाकेबंदी को हमेशा जारी रख सकती है। वहीं ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अगले हफ्ते ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है, जिससे ईरान पूरी तरह से अलग-थलग हो जाएगा।
इधर राष्ट्रपति ट्रंप पर इस अलोकप्रिय युद्ध को समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है क्योंकि पेट्रोल के ऊंचे दामों से उनकी लोकप्रियता प्रभावित हो रही है। इससे आगामी नवंबर के मिडटर्म चुनावों में उनकी पार्टी की संसद पर पकड़ कमजोर हो सकती है, जिससे ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
रिकॉर्ड तेल कीमतें और भारत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 87 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इस बीच भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि एशियाई रिफाइनरियों ने भविष्य की सुरक्षा के लिए अमेरिकी क्रूड खरीदा है।
दूसरी ओर ईरान अपनी जब्त संपत्तियां वापस करने और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की लगातार मांग कर रहा है। इस बीच हूती विद्रोहियों ने ड्रोन से सऊदी अरामको की रिफाइनरी को निशाना बनाया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका फिर बढ़ गई है।
वैश्विक मंदी का खतरा
वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह गंभीर संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो विश्व की आर्थिक विकास दर में भारी गिरावट आ सकती है। इसके अलावा दुनिया के कुछ क्षेत्रों में मंदी आने की कगार पर है, इसलिए वैश्विक कूटनीतिक मोर्चों पर शांति बहाल करने की मांग लगातार तेज हो रही है।
