
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत आयोजित जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में आमजन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही और देरी पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नामांतरण, प्रधानमंत्री आवास की किश्त और संबल योजना की सहायता में विलंब के मामलों में छह अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं कुछ अन्य मामलों में जांच और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ तय समय-सीमा में मिलना चाहिए। शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
छह साल में हुआ नामांतरण, तहसीलदार-पटवारी निलंबित
राजपुर तहसील के अजय-लाल ने बताया कि उनके पिता की वर्ष 2016 में मृत्यु के बाद नामांतरण के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हुई। करीब छह वर्ष की देरी को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार तथा पटवारी मांगीलाल नरगांवे और ललित बोरसे को निलंबित करने के निर्देश दिए। आशा परमार वर्तमान में धार जिले में डिप्टी कलेक्टर हैं।
पीएम आवास की किश्त में देरी पर तीन अधिकारी निलंबित
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही रुपेश शर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 में आवेदन के बाद विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी हुईं, लेकिन पहली किश्त उन्हें 10 अगस्त को मिली। मुख्यमंत्री ने देरी को गंभीर मानते हुए संबंधित अवधि में पदस्थ सीएमओ मायाराम सोलंकी, जगदीश धाकड़ और सहायक यंत्री राजू डावर को निलंबित करने के निर्देश दिए। संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन इंदौर एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
संबल योजना में देरी पर सीईओ निलंबित
पानसेमल के हरि निमवा ठाकुर के संबल योजना के तहत अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता के मामले में भी कार्रवाई हुई। जांच में सामने आया कि प्राथमिकता सूची में नीचे नाम वाले कुछ हितग्राहियों को पहले लाभ दिया गया और ऐसे 16 मामले सामने आए। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सौरभ सिंह ठाकुर को निलंबित करने के निर्देश दिए।
अन्य मामलों में जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना में भुगतान में देरी के मामले में उन्होंने बजट उपलब्ध न होने के कारणों की जांच के निर्देश दिए। इसी तरह पशु बीमा राशि के भुगतान में दो वर्ष से अधिक की देरी पर बीमा कंपनी की भूमिका और भोपाल स्तर पर हुई संभावित त्रुटियों की जांच कराने को कहा। गलती मिलने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान होगा, लेकिन लापरवाही करने वालों को दंडित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आमजन को अपने अधिकार और योजनाओं का लाभ लेने के लिए कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ें। शिकायतों का संवेदनशीलता और समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।