जबलपुर: विक्टोरिया अस्पताल में एक बार फिर गरीबी और बेबसी का ऐसा चेहरा सामने आया जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम हो गईं। लेकिन इस दुखद मोड़ पर गरीब नवाज कमेटी ने इंसानियत की मिशाल पेश की, जिसने समाज को यह भरोसा दिलाया कि कोई भी गरीब लावारिस नहीं है। कमेटी के सदस्यों ने न सिर्फ एक लाचार भाई का संबल बढ़ाया, बल्कि उसकी मृत बहन का ससम्मान अंतिम संस्कार भी संपन्न कराया।
जानकारी के अनुसार मूलत: ग्वालियर निवासी अनिल वर्मा अपनी 50 वर्षीय बहन जयश्री वर्मा के साथ पिछले 4-5 वर्षों से जबलपुर में रह रहे थे। दोनों भाई-बहन एक होटल में काम करतेे थे। रहने का कोई स्थाई ठिकाना न होने के कारण वे रेलवे स्टेशन के फुटपाथ पर ही सोया करते थे। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे। करीब दो-तीन दिन पहले जयश्री वर्मा की तबीयत अचानक बेहद बिगड़ गई। भाई अनिल ने हिम्मत जुटाकर उन्हें विक्टोरिया अस्पताल की कैजुअल्टी में भर्ती कराया। डॉक्टर की टीम ने इलाज शुरू किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान जयश्री वर्मा ने दम तोड़ दिया। बहन की मौत ने अनिल को पूरी तरह तोडक़र रख दिया।
बहन की मौत के बाद अनिल के सामने सबसे बड़ा संकट अंतिम संस्कार के खर्च का खड़ा हो गया।अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण अनिल इस स्थिति में नहीं था कि वह शव को मुक्तिधाम ले जा सके या कफन-दफन की व्यवस्था कर सके। बेबसी और मानसिक तनाव के बीच, वह भारी मन से अपनी बहन के शव को अस्पताल में ही छोडक़र जाने लगा। अस्पताल की कैजुअल्टी से जैसे ही यह सूचना बाहर आई, इसकी भनक तुरंत गरीब नवाज कमेटी को लगी। सूचना मिलते ही कमेटी के सेवादार बिना एक पल गंवाए विक्टोरिया अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने रोते-बिलखते और बदहवास भाई अनिल वर्मा को संभाला, उसे ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि उसकी बहन का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा। गरीब नवाज कमेटी मृतका के शव को तिलवारा मुक्तिधाम लेकर पहुंची वहाँ कमेटी के सभी सदस्यों की मौजूदगी में अनिल वर्मा के हाथों ही उनकी दिवंगत बहन जयश्री वर्मा का अंतिम संस्कार पूरे हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान से संपन्न कराया गया। इस दौरान कमेटी के रियाज़ अली, बाबू खान, मोहम्मद तारिक, दीपक निगम, बच्चू नानकानी, मजहर अली, शौकत अली उपस्थित रहे।
