झारखंड लाठीचार्ज से राहुल की आक्रामक मुहिम कुंद, रक्षात्मक से आक्रामक मुद्रा में आए भाजपाई

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति की बिसात पर युवाओं,बेरोजगारों और छात्रों के हमराही बनने की आक्रामक मुहिम में जुटे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार की ढूलमूल और कछुए चाल की नीतियों ने बैकफुट पर ला दिया है.
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज ने अचानक राहुल गांधी के दिन-रात के आक्रामक अभियान पर उनकी अपनी गठबंधन सरकार द्वारा पानी फेर दिया गया है.
राजनीतिक जानकार बता रहे हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले कुछ वर्षों में देश के युवाओं, छात्रों, पेपर लीक और रोजगार के सवालों को अपने राजनीतिक अभियान के सबसे अग्रिम मोर्चे पर रखा है.

संसद के भीतर हो या बाहर, वे लगातार देश के नौजवानों की आवाज बनकर उभरे थे और युवा विरोधी नीतियों को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की घेराबंदी कर रहे थे. युवाओं के हक में दिया गया उनका हर नारा उनके राजनीतिक ग्राफ को नई ऊंचाइयां दे रहा था. वे युवाओं के बीच एक भरोसे के तौर पर खुद को स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे. लेकिन झारखंड लाठीचार्ज राहुल गांधी की राजनीतिक इच्छाशक्ति या उनकी सोच का परिणाम नहीं था, बल्कि यह राज्य स्तर पर प्रशासनिक तंत्र की घोर संवेदनहीनता और गठबंधन सरकार की मनमानी का नतीजा था. फिर भी इस पूरे घटनाक्रम ने नीट परीक्षा से लेकर देश में बेरोजगारी के हर मोर्चे पर भाजपा को घेरने वाले राहुल गांधी के तरकश के तीरों को एक झटके में कुंद करने का काम किया है. ऐसी स्थिति में अब भाजपा को बैठे-बिठाए एक ऐसा मुद्दा मिल गया है जिसका इस्तेमाल वह राहुल गांधी की न्याय की लड़ाई पर सवाल उठाने के लिए कर रही है.

हालांकि राहुल गांधी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत मोर्चा संभाला उन्होंने न केवल इस लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे पूरी तरह गलत बताया, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे संवाद कर छात्रों की समस्याओं को तुरंत हल करने का आग्रह भी किया. राहुल गांधी की इस तत्परता का ही असर था कि झारखंड सरकार को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा, मंत्रियों की समिति बनानी पड़ी और अब दावा किया जा रहा है कि छात्रों की 99 फीसदी मांगें मान ली गई हैं.

बावजूद इसके भाजपा के रणनीतिकारों के लिए रांची की यह घटना किसी बड़े राजनीतिक जैकपॉट से कम नहीं है. कल तक जो भाजपा पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दों पर संसद से सड़क तक रक्षात्मक मुद्रा में खड़ी नजर आ रही थी, उसे अचानक विपक्ष के ही अभेद्य किले में एक बड़ा सुराख मिल गया है. भाजपा के कुशल रणनीतिकारों ने बिना देर किए इस मौके को लपकते हुए संसद परिसर में भाजपा के सांसदों और नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर राहुल गांधी को सीधे निशाने पर ले लिया है. इतना ही नहीं संसद परिसर में भाजपा सांसदों ने प्रियंका गांधी को घेरकर झारखंड लाठीचार्ज पर राहुल गांधी जवाब दो के नारे लगाए, तो प्रियंका गांधी को यह सफाई देनी पड़ी कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मिल चुके हैं. बहरहाल, राज्य सरकार की इस मनमानी ने राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता को एक ऐसी रक्षात्मक स्थिति पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां उन्हें अपने सहयोगियों की गलतियों पर सफाई देनी पड़ रही है.

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