
बांदकपुर/दमोह। श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर, बांदकपुर में श्रावण मास के पावन अवसर पर चल रहे ग्यारह दिवसीय लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक का आज छठवां दिवस वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धा व भक्तिभाव से संपन्न हुआ। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल शास्त्री महाराज के मार्गदर्शन में 21 ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान व वैदिक परंपरा के अनुसार लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। इस दौरान शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के वैदिक मंत्रों से भगवान श्री देव जागेश्वरनाथ जी का अभिषेक किया गया तथा विश्वकल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि, क्षेत्र की शांति, जनकल्याण और सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान आशुतोष से प्रार्थना की गई। विशेष अभिषेक में भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप पर शहद अर्पित किया गया। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल शास्त्री महाराज ने शहद से शिवलिंग अभिषेक के धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में भगवान शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय माना गया है और विभिन्न द्रव्यों से किया जाने वाला अभिषेक साधक के जीवन में अलग-अलग आध्यात्मिक भावों को जागृत करता है। शहद को मधुरता, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना गया है शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक शहद अर्पित करने का भाव यह है कि मनुष्य अपने जीवन से कटुता, क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता को दूर कर वाणी, व्यवहार और संबंधों में मधुरता का संचार करे उन्होंने कहा कि भगवान शिव को शहद अर्पित करना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन को मधुर बनाने का आध्यात्मिक संकल्प भी है। शहद की मधुरता साधक को यह संदेश देती है कि उसकी वाणी मधुर हो, व्यवहार विनम्र हो, हृदय में करुणा हो और जीवन में परस्पर प्रेम एवं सद्भाव बना रहे उन्होंने बताया कि मधु का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व है और पंचामृत में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है भगवान शिव के अभिषेक में शहद का प्रयोग करते समय श्रद्धालु आरोग्य, सुख-शांति, समृद्धि, सौभाग्य तथा पारिवारिक जीवन में प्रेम एवं मधुर संबंधों की कामना करते हैं भगवान आशुतोष भक्त की भावना देखते हैं, इसलिए शिव आराधना में बाहरी वैभव से अधिक श्रद्धा, विश्वास, संकल्प और समर्पण का महत्व है। उन्होंने कहा कि शिवभक्ति का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर सद्गुणों का विकास करना है श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पंचामृत ,अभिषेक, मधु अभिषेक तथा बेलपत्र अर्पण करते हुए भक्तों को भगवान से धर्म, सद्बुद्धि, संयम, सेवा और लोककल्याण की भावना प्रदान करने की प्रार्थना करनी चाहिए आज के मुख्य यजमानों के रूप में भरत पाठक, उमा असाटी, राजन असाटी, हरिशंकर चौरसिया, संदीप पाठक व राकेश अग्रवाल ने श्रद्धापूर्वक भगवान श्री देव जागेश्वरनाथ का पूजन-अर्चन व रुद्राभिषेक में सहभागिता की मुख्य यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार, समाज व राष्ट्र के सुख-शांति और समृद्धि की कामना की रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान होता रहा ग्यारह दिवसीय लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक के प्रत्येक दिवस भगवान शिव की विशेष आराधना एवं वैदिक विधान के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि श्रावण मास की इस पावन बेला में भगवान श्री देव जागेश्वरनाथ जी के दर्शन कर रुद्राभिषेक एवं शिव आराधना में सहभागी बनें और अपने जीवन में शिवत्व, शांति, संयम व सद्भाव को धारण करने का संकल्प लें उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना केवल व्यक्तिगत कल्याण का माध्यम नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और विश्व के कल्याण की मंगल भावना को मजबूत करने वाली साधना है छठवां दिवस संपन्न होने के साथ ही ग्यारह दिवसीय लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक अपने अगले चरण में प्रवेश कर गया है और आगामी दिनों में भी वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ भगवान श्री देव जागेश्वरनाथ जी की आराधना निरंतर जारी रहेगी।
