
ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच में बिलौआ और रफादपुर क्षेत्र में जारी अवैध उत्खनन व परिवहन के चर्चित मामले पर कड़ा रुख जारी है। हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के पालन में मंगलवार को ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुईं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शनिवार को कराई गई पूरे माइनिंग एरिया व क्रशरों की ड्रोन वीडियोग्राफी (पेन ड्राइव) को कोर्ट रूम में देखा गया, जिसके बाद सुबह से शाम तक मामले पर विस्तृत बहस हुई।
*ड्रोन वीडियोग्राफी से परखी गई एक-एक इंच की स्थिति*
याचिकाकर्ता अकरम खान द्वारा डिफॉल्टर खदानों की लीज के नवीनीकरण को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ियां और तथ्य छिपाने की बात उजागर होने पर कोर्ट ने पूर्व में ही 16 खदानों में खनन पर तत्काल रोक लगा दी थी। क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए कोर्ट के निर्देश पर शनिवार को पूरे माइनिंग और क्रशर जोन की एरियल ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई थी।
*अवैध उत्खनन रोकने खनिज विभाग ने कोर्ट में दिए सुझाव*
अवैध खनन व परिवहन पर कड़ाई से नकेल कसने के लिए खनिज विभाग ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रस्ताव रखे। जिनमे प्रमुख रूप से सीसीटीवी कैमरों से निगरानी: बिलौआ और रफादपुर क्षेत्र की सभी खदानों तथा क्रशरों पर हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
स्वचालित वे-ब्रिज (धर्म कांटा): ओवरलोडिंग रोकने के लिए ऑटोमैटिक वजन मशीनें स्थापित होंगी, जिससे गिट्टी से भरे ट्रकों के गुजरते ही पूरी जानकारी स्क्रीन पर दर्ज हो जाएगी। रूट डायवर्जन की चुनौती: बिलौआ में पुलिस चेकपोस्ट और सख्ती बढ़ने के बाद गिट्टी परिवहन करने वाले ट्रकों द्वारा बिजौली के रास्ते का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी सामने आया।
*खनिज अधिकारियों के विवादित रिकॉर्ड पर घिरे अफसर*
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डीपी सिंह ने तत्कालीन एवं वर्तमान प्रभारी खनिज अधिकारियों के खिलाफ लंबित जांचों के दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। तत्कालीन खनिज अधिकारी यादव पर बिना रॉयल्टी ट्रकों को छोड़ने के गंभीर आरोपों में ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त जांच का ब्योरा पेश किया गया। कोर्ट द्वारा निष्पक्ष व ईमानदार अधिकारी की तैनाती के निर्देशों के बावजूद वर्तमान प्रभारी अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त जांच से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर की उपस्थिति में खनिज प्रशासन को पारदर्शी व्यवस्था बनाने तथा अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं।
