
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (वार्ता) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे का आकलन करने और उसमें सुधार लाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी नागरिक-नेतृत्व वाले अभियान की घोषणा की है। यह पहल नागरिकों, अभिभावकों और ग्राम नेताओं को एकजुट होकर सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इसका खास जोर किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने पर है। ग्रामीण भारत पर केंद्रित इस जमीनी अभियान के बारे में श्री दीपके ने कहा, “असली भारत गांवों में बसता है।”
अभियान के आयोजकों के मुताबिक, स्वतंत्रता के बाद देश में बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास हुआ है, लेकिन कई ग्रामीण सरकारी स्कूल अब भी बिजली, सुरक्षित पेयजल और काम करने योग्य शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। इन स्कूलों में स्वच्छता की खराब व्यवस्था का सबसे अधिक असर छात्राओं पर पड़ता है।
अभियान के आयोजकों ने सवाल उठाया, “क्या हमारे गांवों के बच्चे देश के भविष्य का हिस्सा नहीं हैं? क्या वे हमारे राष्ट्र का हिस्सा नहीं हैं?” उन्होंने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और बेहतर सीखने का माहौल मिलना चाहिए।
आयोजकों के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस केवल देश की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के उन सरकारी स्कूलों की स्थिति पर ध्यान देने का भी मौका है, जहां बड़ी संख्या में बच्चों का भविष्य आकार ले रहा है।
अभियान की शुरुआत हिंगोली गांव से होगी, जहां श्री दीपके स्थानीय सरपंच से मुलाकात कर सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और उन्हें जरूरी सुविधाओं से पूरी तरह लैस करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
सीजेपी ने देशभर के सरपंचों से भी अपने-अपने गांवों के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की इस पहल में शामिल होने की अपील की है। अभियान के तहत स्कूलों में सुधार से पहले और बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जायेंगी। साथ ही, अपने गांव के सरकारी स्कूलों में उल्लेखनीय सुधार करने वाले सरपंचों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की योजना है।
सरपंचों की पहल के साथ अभियान के तहत नागरिकों की भागीदारी से स्कूलों का सामाजिक ऑडिट भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य अभिभावकों और स्थानीय लोगों को सरकारी स्कूलों की स्थिति का स्वतंत्र रूप से आकलन करने का अवसर देना है। अभिभावकों से स्कूलों का दौरा कर यह जांचने की अपील की गयी है कि वहां बिजली की नियमित आपूर्ति, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग और उपयोगी शौचालय तथा पौष्टिक मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है या नहीं।
जहां बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी या उनमें कमी पायी जायेगी, वहां नागरिकों से फोटो और वीडियो के जरिए स्थिति दर्ज करने की अपील की जायेगी। सीजेपी ने स्कूलों की सुविधाओं का आकलन करने के लिए एक मानक ऑडिट फॉर्म का लिंक अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर अभियान के लॉन्च वीडियो के कमेंट सेक्शन में दिया है।
अभियान के उद्देश्य को दोहराते हुए श्री दीपके ने कहा, “यदि हम एकजुट होकर आगे आयें और कार्रवाई करें, तो हम अपने सभी ग्रामीण सरकारी स्कूलों को कल के भविष्य के लिए एक बेहतर जगह बना सकते हैं। असली भारत अपने गांवों में बसता है, और अब समय आ गया है कि हमारे स्कूल भी इस बात को दर्शायें।”
