
सागर। संगीत में सतत् अभ्यास नितांत आवश्यक है, गुरु कितने भी परिश्रम से, कितने भी लंबे समय तक शिष्यों को संगीत एवं नृत्य कला की गहन शिक्षा प्रदान करता हो, किन्तु यदि शिष्य प्राप्त शिक्षा का सतत् अभ्यास नहीं करता है तो वह प्राप्त शिक्षा अथवा कला धीरे-धीरे क्षीण होती जाती है। उक्त उद्गार शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्टता महाविद्यालय सागर के नृत्य एवं संगीत विभाग द्वारा आयोजित भातखंडे जयंती पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ संगीतज्ञ, कला एवं रंगकर्मी एवं वाणिज्य विभाग के पूर्व प्राध्यापक डॉ. अनिल शर्मा ने व्यक्त किए। आपने कहा कि संगीत हमारे चहुँ ओर विद्यमान है। संगीत को सीखे बिना भी उसे महसूस किया जा सकता है। संगीत एवं नृत्य की प्रकृति के मूल में मौन ध्यान की साधना व धैर्य के साथ कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास,विद्यार्थी एवं जिज्ञासु बने रहना ही संगीत साधक की पहचान होती है।
भातखंडे जयंती समारोह का श्री गणेश अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। इस अवसर पर संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा मनमोहक सुर,लय,तालबद्ध सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन कर रहे आयोजन सचिव डॉ. प्रेम चतुर्वेदी ने अतिथियों का विस्तृत परिचय देते हुए कहा कि हमारे मुख्य अतिथि डॉ. शर्मा जी 18 कलाओं में निपुण रहे हैं जिसे तत्कालीन कलेक्टर साहब ने भी एक बार समारोह में जिक्र किया था।आप वाणिज्य के प्राध्यापक होते हुए भी कुशल संगीतज्ञ हैं। प्राचार्य डॉ.आनंद तिवारी सर महाविद्यालय में आयोजित सभी नृत्य एवं संगीत कार्यक्रमों हेतु अपना अधिकाधिक योगदान एवं आशीर्वाद रखते हैं।नृत्य विभागाध्यक्ष डॉ. अपर्णा चाचोंदिया ने इस अवसर पर अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की एवं शास्त्रीय संगीत (गायन, वादन, नृत्य) के प्रणेता पंडित विष्णु नारायण भातखंडे जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।पेशे से एडवोकेट होते हुए भी आपने शास्त्रीय संगीत का पुनरुद्धार किया। भातखंडे जी के बाद से ही संगीत का शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त करना सुगम हुआ। संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. हरिओम सोनी ने इस गरिमामय महोत्सव के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भातखंडे जी को संगीत जगत् युगपुरुष के रूप में जानता है ।हमारे यहां आप देवतुल्य पूजे जाते हैं।इस अवसर पर संगीत विभाग की भूतपूर्व छात्र रामसखी सौर ने भी भातखंडे जी के व्यक्तित्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस समारोह में नृत्य विभाग की छात्राओं ने मौसम एवं अवसर के अनुकूल मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी,जिसे सम्पूर्ण सभागार द्वारा सराहा गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में गर्ल्स कालेज के प्राचार्य डॉ.आनंद तिवारी ने संगीत एवं नृत्य को दैवीय कला बताया। आपने कहा बिना भगवद्कृपा के अच्छा गुरु नहीं मिल सकता, बिना अच्छा गुरु मिले इस कला में दक्षता प्राप्त नहीं हो सकती,बिना दक्षता प्राप्त किए केवल डिग्री प्राप्त करके समय आने पर यह उपाधियां या डिग्री फलीभूत नहीं होतीं हैं।
महाविद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी डा.अंजना चतुर्वेदी ने इस आयोजन की अपार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंचासीन अतिथियों,आयोजकों,r महाविद्यालय परिवार एवं छात्राओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।
इस समारोह में महाविद्यालय का समग्र परिवार एवं बड़ी संख्या में छात्राओं ने उपस्थित होकर समारोह में हो रही रसवर्षा का आस्वादन किया।
