भोपाल। मध्यप्रदेश में जेलों को सुरक्षित, संवेदनशील और सुधारात्मक संस्थानों के रूप में विकसित करने की दिशा में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग द्वारा विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने केंद्रीय जेल बड़वानी के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की।
डॉ. कपूर ने बैरकों, रसोई, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, बंदी कल्याण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों का जायजा लिया। उन्होंने जेल उद्योगों की कार्यप्रणाली, बंदियों की भागीदारी, कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जेल उद्योग बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में सफल पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
महिला वार्ड के निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनके निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को उपहार भी वितरित किए।
डॉ. कपूर ने जेल में ‘जेल वाणी’ पहल का शुभारंभ कर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रेरणादायी विचारों, संगीत और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से बंदियों को मानसिक रूप से सकारात्मक बनाए रखने तथा परिवार एवं समाज से भावनात्मक जुड़ाव कायम रखने में यह पहल उपयोगी होगी।
उन्होंने नवीनीकृत स्कूल और पुस्तकालय का भी उद्घाटन किया तथा शैक्षणिक सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने शिक्षा को बंदियों के पुनर्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्हें अध्ययन, आत्म-विकास और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जेल प्रशासन की पहलों की सराहना करते हुए बंदियों के आवेदनों का शीघ्र निराकरण और उचित प्रकरणों को जेल मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए।
