नागासाकी परमाणु त्रासदी के 81 साल

नागासाकी, 09 अगस्त (वार्ता) जापान के नागासाकी शहर पर अमेरिकी परमाणु हमले की रविवार को 81वीं बरसी मनाई गई। नागासाकी पीस पार्क में आयोजित वार्षिक शांति स्मारक समारोह में परमाणु बम पीड़ितों, उनके परिवारों, विदेशी प्रतिनिधियों और शीर्ष नेताओं ने 11:02 बजे मौन रखकर त्रासदी में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। यह ठीक वही समय था जब नौ अगस्त 1945 को शहर पर परमाणु बम गिराया गया था। देश की प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार नागासाकी पहुंचीं सानाए ताकाइची ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि जापान ‘तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों (परमाणु हथियार न रखने, न बनाने और न लाने देने)’ का पालन करता है और परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के लिए व्यावहारिक पहल को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्रियों के विपरीत सुश्री ताकाइची ने भविष्य में इन सिद्धांतों को ‘जारी रखने’ का कोई स्पष्ट वादा नहीं किया। वर्ष के अंत में जापान के राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेजों में होने वाले संशोधन से ठीक पहले उनके इस रुख ने सवाल खड़े कर दिए हैं। बाद में संवाददाता सम्मेलन में जब उनसे पूछा गया कि क्या सुरक्षा समीक्षा के तहत गैर-परमाणु सिद्धांतों में बदलाव होगा, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि समीक्षा प्रक्रिया जारी है और इस पर अभी से टिप्पणी करना सही नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि अपनी 2024 की पुस्तक ‘कोकुर्योकु केनक्यू’ में ताकाइची ने लिखा था कि संकट के समय देश में अमेरिकी परमाणु हथियारों की तैनाती न होने देना सुरक्षा के लिहाज से व्यावहारिक नहीं है।

दूसरी ओर, नागासाकी के मेयर शिरो सुजुकी ने ‘शांति घोषणा पत्र’ जारी करते हुए कहा कि बड़ी ताकतों द्वारा दबाव डालकर अपनी नीतियाँ लागू करने से परमाणु हथियारों को खत्म करने की कोशिशें रुक रही हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि पूरी तरह विनाशकारी हैं। मेयर ने यह भी कहा कि नागासाकी दुनिया का आखिरी परमाणु हमले वाला शहर होना चाहिए। उन्होंने जापान सरकार से परमाणु हथियारों से दूर रहने की नीति और शांतिवादी संविधान का पालन करने तथा परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाली संयुक्त राष्ट्र की संधि की बैठक में शामिल होने की अपील की। समारोह में परमाणु हमले के बचे हुए प्रत्यक्षदर्शियों (हिबाकुशा) की घटती संख्या को भी रेखांकित किया गया। जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च तक प्रत्यक्षदर्शियों की संख्या घटकर 91,105 रह गई है, जिनकी औसत आयु 86.6 वर्ष है। पिछले एक साल में 2,773 अन्य पीड़ितों के निधन की पुष्टि के साथ इस त्रासदी में मारे गए लोगों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 2,04,708 हो गई है। समारोह के दौरान 1945 में छह वर्ष की आयु में हमले का शिकार हुई एक प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनकी दादी ने अपने शरीर से ढककर उनकी जान बचाई, लेकिन पीठ पर लगे गंभीर घावों का इलाज न मिलने के कारण अगले ही साल उनका निधन हो गया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध सहित वैश्विक संघर्षों पर दुख व्यक्त करते हुए विश्व नेताओं से संवाद के ज़रिए शांति स्थापित करने की अपील की।

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