
बीना। सावन माह में आस्था का सैलाब एक बार फिर सड़कों पर उमड़ पड़ा। देव रघुनाथ मंदिर, बड़ा मंदिर मोतीचूर नदी घाट से “वीर हनुमान कावड़ यात्रा” श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर, उदयपुर के लिए श्रद्धा पूर्वक रवाना हुई।कावड़ यात्रा का महत्व और दर्शन कावड़ यात्रा केवल जल लाने की परंपरा नहीं, बल्कि यह आस्था, त्याग, तप और भक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि कावड़ लेकर पैदल यात्रा कर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। कावड़िये इस यात्रा के दौरान अनुशासन, सेवा और समर्पण का संदेश देते हैं।हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा शहर यात्रा के शुभारंभ के समय हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। एक ओर झमाझम बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब भी कम नहीं था। कावड़ियों के हाथों में ध्वज और कंधों पर कावड़ लिए भक्त लगातार “बोल बम, हर-हर महादेव” के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।यात्रा में शामिल भक्तों का कहना था कि कावड़ यात्रा हमें त्याग, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण सिखाती है। बारिश, धूप या कठिनाइयां कुछ भी हमारी भक्ति को कम नहीं कर सकतीं। भगवान शिव की कृपा से ही हम यह यात्रा पूरी कर पाते हैं।भक्तों में उत्साह देखते ही बन रहा था। मार्ग में लोगों ने कावड़ियों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उनके लिए जलपान व विश्राम की व्यवस्था की।कावड़ यात्रा के सकुशल संपन्न होने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
