इंदौर:बारिश सिर्फ पानी नहीं लाती, बल्कि कई बस्तियों के परिवारों के लिए आफत लेकर आती है. स्थानीय प्रशासन द्वारा जलभराव रोकने के सालों से किए जा रहे दावे, करोड़ों की बनाई जाने वाली योजनाएं और हर मानसून से पहले बड़े पैमाने पर तैयारियां की जाती हैं, फिर बारिश होते ही बस्तियां क्यों डूबती हैं? यह प्रश्न जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है. दरअसल, इसका कारण प्रशासनिक लापरवाही, कमजोर ड्रेनेज सिस्टम और अनियोजित विकास हैं. नतीजतन, हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जलभराव की समस्या बनी रहती है
शहर को स्मार्ट और आधुनिक बनाने के दावे वर्षों से किए जा रहे हैं. लेकिन बारिश होते ही तस्वीर बदल जाती है.
निचली बस्तियों और नालों-नदियों के किनारे बसे इलाकों में पानी भरना अब मानो हर मानसून की नियती बन चुका है. शहर के द्वारकापुरी, सिकंदराबाद, तिलक नगर, पिपल्याहाना, खजराना, गीता नगर, धार रोड, सिरपुर, भमोरी, मालवा मिल, बियाबानी, सीपी शेखर नगर, टापू नगर, कबूतरखाना, हवा बंगला, कुंदन नगर, पालदा, भागीरथपुरा, परदेशीपुरा, लसूड़िया मोरी और देवास नाका सहित कई क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं. बारिश का पानी घरों में घुसता है तो जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. कई बार लोगों को स्कूल आंगनवाड़ी और सुरक्षित स्थानों में शरण लेनी पड़ती है. सवाल यह है कि वर्षों से नालों की सफाई ड्रेनेज सुधार और जलभराव खत्म करने के दावे किए जा रहे हैं फिर भी समस्या जस की तस क्यों है?
यह बोले पार्षदगण…
स्टाप वाटर की फाइल लगाई है, अभी तक पास नहीं की गई. जो लाइन डली है, वह चालू नहीं है. नाले पर जो घर बने हुए हैं, अगर निगम द्वार उन्हें स्थानांतरित कर बाउंड्री वॉल बनाने से लोग प्रभावित नहीं होंगे.
– विनीत मौर्य, पार्षद, वार्ड 23 (परदेशीपुरा)
बस्तियों के अलावा जहां-जहां जल भराव होता था, वहां पानी की निकासी कर दी गई है. नालों की सफाई हो चुकी है, जेसीबी, ड्रेनेज टीम और आपदा टीम के साथ परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है.
राकेश सोलंकी, पार्षद, वार्ड 35 (लसूड़िया मोरी)
एक दो क्षेत्र हैं, जिनमें गार्डन नालों पर बने हुए हैं. नाले उफान होने पर ऐसे स्थानों पर जल जमाव हो जाता है. हालांकि ज्यादा समस्या नहीं होती. नाला सफाई हो चुकी है, आपातकालीन टीम तैयार है.
– राहुल जायसवाल, पार्षद, वार्ड 9 (मरीमाता
