न्याय तभी संभव, जब हम पीडि़त के दु:ख-दर्द को उसकी भाषा में समझें

इंदौर. भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है. हर क्षेत्र और स्थान के अनुसार परेशानियों का प्रकार भी बदलता रहता है. जिस क्षेत्र में जो परेशानी आ रही है, हमें उसी क्षेत्र की भाषा, व्यवहार और प्रकृति के अनुसार संवाद करना चाहिए. जो न्याय की आस में आपके पास आया है, उसकी आधी परेशानी सिर्फ आपके व्यवहार से ही दूर हो जाती है. यदि आप उससे उसी की भाषा में सही तरह से संवाद करेंगे तो वह सहज होने लगेगा और आपके ऊपर उसका विश्वास बढ़ता जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत इंदौर में आयोजित ‘इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ विषय पर केंद्रित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि आप सभी को अधिकार दिलाने की बात करते हैं और कोई एक व्यक्ति भी उन अधिकारों को पाने में सफल नहीं होता तो आप फेल हो जाते हैं. इसलिए सभी को समान अधिकार मिलें यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है.

कोई परेशानी लेकर आए तो ठीक तरह से संवाद करें

न्यायमूति सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई न्याय के लिए आता है तो आपका व्यवहार उसके प्रति कैसा है, आप उसे कितना सम्मान देते हैं, यह उसकी परेशानियों को आधा कम कर देता है. यदि आप उसकी परेशानी को सही तरीके से नहीं समझेंगे तो आपको उसका निदान करने में भी मुश्किल आएगी. इसलिए सही तरीके से संवाद करना सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा जिस तरह से डॉक्टर मरीज से बहुत शांत होकर, सकारात्मक तरीके से बात करते हैं और मरीज को विश्वास दिलाते हैं कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे. इसी तरह न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी विभागों और व्यवस्थाओं के लोगों को पीडि़त से इस तरह से संवाद करना चाहिए ताकि उसकी परेशानी कम हो.

समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है. समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है. हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे?

न्याय की धरती पर यह आयोजन होना गर्व की बात: मुख्यमंत्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर की नगरी माता अहिल्याबाई होल्कर के न्याय के लिए जानी जाती है. उन्होंने न्याय के लिए अपने पुत्र और प्रजा में भी भेद नहीं किया. अपने पुत्र को भी दंड दिया और समाज को न्याय की सही परिभाषा दी. इसी तरह महाराज विक्रमादित्य ने भी अपनी धर्मपत्नी के भाई को मृत्युदंड दिया और समाज में न्याय स्थापित किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पुरातन संस्कृति और सभ्यता न्याय आधारित रही है. पंच परमेश्वर से लेकर राजा-महाराजा तक प्रजा को सही तरह से न्याय दिलाने में पूर्ण यकीन रखते थे. आज भारत में न्याय सभी की पहुंच में हो और सही समय पर मिले हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इसके लिए सरकार और न्यायपालिका मिलकर काम कर रहे हैं.

संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता हमारी न्याय प्रणाली की आत्मा

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है. एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीडि़त व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाएं, बल्कि उसे न्याय भी दिलवाएं, जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी, सुलभ, सुगम, शीघ्र, सस्ती, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो.

 

कॉन्फ्रेंस में ये थे उपस्थित

 

 

कॉन्फ्रेंस को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन,केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक रुसिया, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने भी संबोधित किया. कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे.

 

कल भी चलेगी कॉन्फ्रेंस

 

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 8 और 9 अगस्त को वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में यह 2 दिवसीय पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है. इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश समेत सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी और कई अन्य प्रतिष्ठित नागरिक हिस्सा ले रहे हैं.

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