डीलरशिप देने का झांसा, गुजरात के कारोबारी से एक करोड़ हड़पे

 

इंदौर. गुजरात में डीलरशिप देने का झांसा देकर कारोबारी से एक करोड़ रुपए लेने के बाद न माल दिया और न मूल रकम लौटाई. जुलाई 2022 तक 28.50 लाख रुपए डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन मनी के रूप में देने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया. रकम मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में क्राइम ब्रांच ने इंदौर की दो कंपनियों के डायरेक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया है.

झालोद, जिला दाहोद निवासी कमलेश अग्रवाल ने क्राइम ब्रांच के डीसीपी कार्यालय में शिकायत की थी. इसमें बताया कि इंदौर की मेसर्स आईएचएल मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड और इन्फुटेक हेल्थकेयर लिमिटेड के डायरेक्टर आदित्य गुप्ता और मनोहरलाल गुप्ता ने गुजरात क्षेत्र की डीलर-डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने का प्रस्ताव दिया था. इसके लिए दोनों कंपनियों के संचालकों ने उनसे 50-50 लाख रुपए जमा करवाए. इस तरह कुल एक करोड़ रुपए लिए. शिकायत के मुताबिक शुरुआत में कारोबार का भरोसा कायम रखने के लिए जुलाई 2022 तक 28.50 लाख रुपए डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन मनी के रूप में दिए गए. इसके बाद न तो मार्जिन मनी दी गई और न ही डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर कारोबार करने के लिए माल उपलब्ध कराया गया. कमलेश ने मूल राशि वापस मांगी तो आरोपियों पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है. इसके बाद कारोबारी ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की. पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, लेजर और दोनों पक्षों के बीच हुए पत्राचार की जांच की. मामले में जिला अभियोजन कार्यालय से कानूनी राय भी ली गई. जांच के बाद क्राइम ब्रांच थाने में 5 अगस्त को अपराध क्रमांक 113/2026 दर्ज किया. मामले में मनोहरलाल गुप्ता उम्र 74 साल, निवासी जानकीनगर एक्सटेंशन, राम मंदिर के पीछे, भंवरकुआं को आरोपी बनाया है. वह आईएचएल मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड और इन्फुटेक हेल्थकेयर लिमिटेड का डायरेक्टर व मुख्य संचालक बताया गया है. दूसरे डायरेक्टर आदित्य गुप्ता की भूमिका की भी जांच की जा रही है. प्रकरण के विवरण में गुजरात क्षेत्र की डीलरशिप के नाम पर ली गई रकम एक करोड़ रुपए बताई गई है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में कुल धोखाधड़ी की राशि 2.14 करोड़ रुपए अंकित है. इस अंतर की भी जांच की जा रही है. पुलिस कंपनियों के बैंक खातों, लेजर और कारोबारी लेनदेन की जानकारी जुटा रही है.

मामले में जांच जारी है…

डीलरशिप देने के नाम पर राशि लेने और बाद में डीलरशिप नहीं देने तथा रकम वापस नहीं करने की शिकायत की जांच के बाद अपराध दर्ज किया है. बैंक स्टेटमेंट, लेजर और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई है. मामले में आरोपियों की भूमिका और लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच जारी है.

डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी

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