जबलपुर: अपर सत्र न्यायाधीश एमडी रजक की अदालत ने घरेलू हिंसा को लेकर दायर मामले में निचली अदालत द्वारा दिये गये फैसले को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी है। दरअसल अपीलीय न्यायालय ने पाया कि अपीलकर्ता ने जो आरोप अपनी बहू के रिश्तेदारों पर लगाये है, वह किसी तरह से साबित नहीं होने पर ही विचारण न्यायालय ने उनके खिलाफ संज्ञान न लेते हुए उनके पक्ष में राहतकारी आदेश दिया है। जिस पर अपीलीय न्यायालय ने अपनी मुहर लगाते हुए दायर अपील खारिज कर दी।
क्या था मामला-
दरअसल यह अपील पनागर परियट निवासी शीला पालीवाल की ओर से दायर की गई थी। जिसमें उनके पुत्र प्रियंक पालीवाल की मौत के बाद उनकी बहू निकिता व उनके रिश्तेदार घमापुर लालमाटी निवासी संतोष शुक्ला, उनकी पत्नी मीना शुक्ला, सुश्री अंकिता शुक्ला व शरद तिवारी के खिलाफ घरेलू हिंसा से संबंधित प्रकरण दर्ज किया गया था। जिसमें आरोप था कि बहू के साथ मिलकर उनके रिश्तेदार उन्हें प्रताड़ित करते है, जिस पर यह परिवाद दायर किया गया है।
रिश्तेदारों की सहभागिता नहीं हो सकी साबित-
मामले में अनावेदक संतोष शुक्ला, शरद तिवारी की ओर से अधिवक्ता संजय शर्मा व मीना शुक्ला, अंकिता शुक्ला की ओर से अधिवक्ता प्रतिमा गुप्ता ने पक्ष रखा। जिन्होंने विचारण न्यायालय को बताया कि अनावेदकगणों का उक्त मामले से कोई संबंध नहीं है, वह सिर्फ आवेदिका की बहू के रिश्तेदार है, जो कि अलग-अलग स्थानों पर रहते है। इतना ही नहीं मामले में जो आरोप लगाये गये है, उससे संंबंधित न तो कोई शिकायत पुलिस में आवेदिका की ओर से दर्ज करायी गई और न ही कोई ऐसे दस्तावेज व प्रमाण न्यायालय के समक्ष पेश किये गये।
विचारण न्यायालय के आदेश पर लगी मुहर-
जिस पर विचारण न्यायालय ने 17 मई 2025 को अनावेदकों के पक्ष में राहतकारी आदेश दिया था। जिसे चुनौती देते हुए शीला पालीवाल की ओर से उक्त अपील दायर की गई थी। मामले में अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता संजय शर्मा, प्रतिमा गुप्ता की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने विचारण न्यायालय ने विधि सम्मत पाते हुए उसे उचित करार देते हुए दायर अपील अस्वीकार कर दी।
