दतिया : कईयों का कैरियर चौपट, कुछ को मिली संजीवनी

ग्वालियर चंबल डायरी

हरीश

दतिया का नतीजा आ गया। यह पहला उपचुनाव है जिसमें दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल अपनों से ही परेशान रहे और चुनाव प्रचार के साथ घर में बैठे भितरघातियों की तलाश में जुटे रहे। कांग्रेस प्रत्याशी ने तो नतीजा आने के पहले ही तीन बार के निवर्तमान विधायक पर भाजपा से सांठगांठ और भितरघात करने के आरोप लगाकर पार्टी से निकलवा दिया। भाजपा में अनुशासन का डंडा शिकस्त खाने के बाद चला और पूरी जिला कार्यकारिणी ही भंग कर दी गई। दतिया के इस उपचुनाव में भले ही भाजपा से आशुतोष तिवारी और कांग्रेस से घनश्याम सिंह उम्मीदवार थे लेकिन पूरे चुनाव अभियान में नरोत्तम मिश्रा ही केंद्रबिंदु बने रहे। यह माना गया कि उक्त उपचुनाव का नतीजा नरोत्तम का राजनीतिक भविष्य निर्धारित करेगा। भाजपा यदि दतिया में विजयश्री का वरण करती तो नरोत्तम के प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पुनर्वास की संभावनाएं बनी हुई थीं लेकिन दतिया के नतीजे ने उनके सियासी सफर को लॉक कर दिया। नरोत्तम यह समझ चुके हैं, लिहाजा उन्होंने नतीजा आते ही अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया।

उनके शब्दों मे “मेरी राजनीति का अब पटाक्षेप हो गया है”। हालांकि, नरोत्तम इसे फाइनल पटाक्षेप नहीं मानते। नरोत्तम की मानें तो उनकी अब कोई बड़ा पद लेने की इच्छा नहीं है और कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे। नतीजा आने के बाद सीएम हाउस में बड़ी समीक्षात्मक बैठक हो चुकी है। प्रदेश संगठन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी भी बना दी है। नरोत्तम समर्थकों के एकाधिकारिक वर्चस्व वाले दतिया जिला भाजपा की संगठनात्मक संरचना को शून्य घोषित कर दिया गया है। बहरहाल, विधानसभा चुनाव में ढाई साल से भी कम वक्त बचा है, अगले साल स्थानीय निकायों के चुनाव भी होना है, सभी का आंकलन इस बात पर है कि दतिया का जनादेश भविष्य की इन राजनीतिक चुनौतियों को किस हद तक प्रभावित करेगा।

प्रदेश की सत्ता और उसके पार्टी संगठन ने इन चुनावों को सबक के रूप में लिया है और कमियों की तलाश कर भविष्य के लिए खुद को कसा जा रहा है। वहीं करीब साल भर पहले विजयपुर उपचुनाव जीतने के बाद अब दतिया में भी परचम फहराने के बाद कांग्रेस जोश से भरी हुई है। आज बुधवार की शाम दतिया की सड़कों पर जीतू पटवारी, घनश्याम सिंह और अन्य बड़े नेताओं के नेतृत्व में निकले विजय जुलूस में जिस जोश खरोश के साथ भीड़ उमड़ी, उससे जाहिर होता है कि दतिया उपचुनाव ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया है। देखना है कि इस उत्साह को कांग्रेस कब तक बरकरार रख सकेगी और भाजपा कथित भितरघातियों पर क्या कड़े कदम उठाती है।

चंबल में महिला कांग्रेस को मिला नया नेतृत्व

काफी मशक्कत और कई महीनों तक चली मशक्कत के बाद ग्वालियर चंबल के तमाम जिलों में महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दी गईं हैं। अंचल की कई महिला नेत्रियां यह ओहदे पाने की दौड़ में थीं। यह नियुक्तियां सीधे अलका लांबा के दिशा निर्देशन में सूबा सदर रीना बोरासी ने की हैं। दावा तो यही किया जा रहा है कि पार्टी के प्रति निष्ठावान और वर्षों से भाजपा के खिलाफ आंदोलनों में बढ़चढ़कर अग्रणी भूमिका निभाने वालीं पुरानी कार्यकर्ताओं को ही मौका दिया गया है। भिंड शहर की अध्यक्ष बनाई गईं शान्ति कुशवाहा अर्से से भिंड सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहीं हैं। हालांकि वे लहार की बहू हैं लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र भिंड शहर को बनाया हुआ है। ग्वालियर शहर में ज्योति सिंह, मुरैना शहर में ममता कुशवाहा तो मुरैना देहात में मंजू सिकरवार को अध्यक्षी मिली है। इनकी भी पार्टी के प्रति निष्ठा असंदिग्ध मानी जाती है। कांग्रेस में युवा कांग्रेस के बाद महिला कांग्रेस को ही सबसे बड़ा मोर्चा संगठन माना जाता है। महाराज के कांग्रेस छोड़ने के बाद से महिला कांग्रेस का जो संगठनात्मक आधार कमजोर हुआ है, उसे फिर से दुरुस्त कर मिशन 28 के लिए मुकाबिल करने की अहम जिम्मेदारी नई सदर साहिबानों पर होगी।

महंगा पड़ा साजिश रचना…

चुनाव से एक दिन पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल का एक फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, इसमें बताया गया था कि दतिया के भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इस पूरे लेटर को दतिया के ही एक साहब द्वारा बनाया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। कहा जा रहा है कि इस लेटर पर कुशवाहा समाज ने यकीन कर लिया, कुशवाहा समाज का वोट काफी कांग्रेस में चला गया और भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। दतिया में हुई हार के बाद सत्ता शीर्ष और प्रदेश संगठन बहुत ही गुस्से में है. इसके बाद उस लेटर को जारी करने वाले सहित तीन लोगों को भोपाल क्राइम ब्रांच ने उठा लिया है. ये सभी दतिया के ही एक दिग्गज की टीम के हैं। हालांकि कल हुई अहम बैठक के बाद रघुवीर कुशवाहा सहित दतिया के सभी पदाधिकारियों को पदच्युत कर दिया गया है। अगले 72 घंटो के अंदर कुछ और बड़े चेहरों को भी बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। खबर यह भी है कि पराजित प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को दतिया भाजपा का नया सदर बनाया जा सकता है ताकि 28 के लिए वे स्थानीय संगठन पर पकड़ बना सकें।

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