सना, 10 अगस्त (वार्ता) लाल सागर के बंदरगाह शहर अल-मोखा पर हूती मिसाइल और ड्रोन हमले में सात लोग मारे गये और 30 अन्य घायल हो गये।
यमन के सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने सोमवार को कहा कि हूती मिसाइल और ड्रोन हमले में चार सैनिक और तीन नागरिक मारे गये, जबकि घायल होने वालों में अधिकांश नागरिक थे।
श्री अल-नुज़ैली ने कहा कि इन हमलों में पूरे शहर में आवासीय क्षेत्रों, बिजली उत्पादन स्टेशनों और अन्य बुनियादी ढांचों सहित सैन्य और नागरिक दोनों स्थलों को निशाना बनाया गया।
यमन की सेना ने कहा कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने हमले में शामिल 11 ड्रोनों को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। दो बैलिस्टिक मिसाइलें भी अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचे बिना समुद्र में गिर गयीं।
हूतियों ने कहा कि उन्होंने इलाके में सऊदी सैनिकों और हथियारों के डिपो को निशाना बनाया था।
यमन की सेना के अनुसार, ताजा हमले अल-मोखा और उसके वाणिज्यिक बंदरगाह पर हूती के पिछले हमले के 24 घंटे से भी कम समय बाद हुए हैं। उन हमलों में आठ सैन्य कर्मियों और तीन नागरिकों सहित कम से कम 11 लोग मारे गये थे और 32 अन्य घायल हुए थे।
हूतियों को पहले अंसार अल्लाह के नाम से जाना जाता था। उन्होंने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिससे सऊदी समर्थित सरकार बेदखल हो गयी थी और एक व्यापक संघर्ष शुरू हो गया था।
सऊदी अरब ने एक गठबंधन का नेतृत्व किया जिसने ईरान-संरक्षित आंदोलन को पीछे धकेलने के प्रयास में 2015 में यमन में हस्तक्षेप किया।
हूतियों का सना और पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण बरकरार है।
अंसारुल्ला राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने सोमवार को सऊदी अरब पर यमन के पश्चिमी तटीय बंदरगाह मोखा को सैन्य अड्डे में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सैनिकों की कथित तैनाती का उद्देश्य यमन के खिलाफ नये सैन्य अभियानों की तैयारी करना और देश की आर्थिक स्थिति को बदतर बनाना था।
श्री अल-फराह ने अपने एक्स खाते पर साझा किये संदेश में कहा कि मोखा में सैन्य गतिविधि यमन पर अपने राजनीतिक प्रभाव को बहाल करने और अमेरिकी तथा क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने के व्यापक सऊदी प्रयास का हिस्सा थी।
उन्होंने कहा कि सऊदी सैन्य जमावड़े का उद्देश्य यमन के लोगों पर विदेशी कब्जे को स्वीकार करने के लिए दबाव डालना था। श्री अल-फराह ने कहा कि यमन की जनता बाहरी हस्तक्षेप के अपने विरोध को नहीं छोड़ेगी और न ही बलपूर्वक थोपे गये राजनीतिक और सैन्य निर्णयों को स्वीकार करेगी।
