महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
दतिया उपचुनााव में भाजपा को करारी शिकस्त देने के बाद कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने जिस तरह जीत का जश्र मनाया उससे यह स्पष्ट हो गया कि निकट भविष्य में महाकौशल सहित पूरे प्रदेश के सियासी गणित बदलने वाले हैं। इस उपचुनाव के परिणाम ने भाजपाई खेमे में चिंता की लहर उत्पन्न कर दी है। पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय संगठन तक दतिया में हुई चूक की वजह तलाशी जाने लगी है। इससे महाकौशल के राजनीतिक केंद्र बिंदु जबलपुर में भी नई बहस छिड़ गई है। जीत से गदगद कांग्रेसी इसे बदलाव की बयार बता रहे हैं, वहीं जबलपुर भाजपा के नेता मुंगेरीलाल के सपने निरूपित कर रहे हैं। पूर्व मंत्री तरूण भनोट ने सरेराह बयान दिया कि दतिया उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा नेताओं के दंभ को चकनाचूर कर दिया है है, हम जनआशीर्वाद लेकर मध्यप्रदेश सहित केंद्रीय सरकार बदलेंगे और ऐसी सरकार बनाएंगे जो निष्ठा और ईमानदारी से काम करेगी। तरूण के बयान के अलावा कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं जाहिर कीं।
इसके जवाब में किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक तौर पर कोई बयान तो नहीं दिया मगर भाजपाईयों के व्हॉट्सएप ग्रुपों में जो संदेशों का आदान प्रदान हुआ उससे यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस ने अभी से ही मुगालता पाल लिया है। वहीं जमीन से जुड़े भगवादल कार्यकर्ताओं ने दतिया एपिसोड को पार्टी के लिए नुकसानदेय मानते हुए पार्टी कर्णधारों को चेत जाने की सलाह दी। खाटी भाजपाईयों के बीच चर्चा सरगर्म है कि हाल ही में स्थानीय वरिष्ठ नेताओं ने जिस तरह सोशल मीडिया में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से बयानों के तीर छोड़े हैं उससे स्पष्ट है कि बड़े पदों में विराजित अपने ही नेताओं की कार्यप्रणाली से वह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में यह अनुमान सहजता से लगाया जा सकता है कि संशयपूर्ण हालात किस दल में हैं। यद्यपि सतही तौर पर दिखाया यही जा रहा है कि एक उपचुनाव परिणाम विपरीत चले जाने से समग्र परिदृश्य नहीं बदलने वाला, मतलब ऑल इज वेल ही रहने वाला है।
हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था….
हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था.. ये पंक्ति जबलपुर के ड्रग विभाग में इन दिनों फिट बैठते हुए नजर आ रही है। धीरे-धीरे सुलगती गई चिंगारी की आंच आखिरकार जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टर पर पड़ ही गई। नतीजा यह रहा कि नियंत्रक, खाद्य सुरक्षा एवं नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, भोपाल ने उन्हें निलंबित कर दिया। पहले से ही छिंदवाड़ा सिरप कांड में निलंबित चल रहे शरद जैन के बाद अब देवेन्द्र कुमार जैन पर निलंबन की कार्यवाही भोपाल स्तर से हुई तो विभाग में हड़कंप मच गया। चर्चाएं जोरों पर थीं कि जिसने भोपाल में उनकी शिकायतें कीं वो ड्रग इंस्पेक्टर के बेहद करीब थे और साहब के साथ उठना बैठना भी बहुत था।
उधर जबलपुर जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की कमान किस दवा निरीक्षक के हाथ में सौंपी जाएगी इसको लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। खबर है कि विभाग को लगातार ड्रग इंस्पेक्टर देवेंद्र जैन के खिलाफ शिकायतें मिल रहीं थीं जिसके बाद मुख्यालय से उन पर नजर रखी जा रही थी, जिसकी ड्रग इंस्पेक्टर को भनक तक नहीं लग पाई, अंतत: कार्रवाई की सुई साहब की तरफ घूम ही गई। विभाग की ओर से जो कारण बताया गया उसके अनुसार नवीन औषधि विक्रय अनुज्ञप्ति (ड्रग लाइसेंस) से संबंधित डिंडोरी के 1 आवेदन और जबलपुर के 12 आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निराकरण साहब को करना था लेकिन 30 दिनों के बाद भी उन्होंने निराकरण नहीं किया। विभागीय सूत्रों की मानें तो व्यवहारिक शिकायतों के अलावा साहब की तय फीस न मिल पाना उनको निलंबित करवा गई।
