नयी दिल्ली, 05 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बुधवार को कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसे पेशेवर पायलटों को तैयार करना है जो ने केवल घरेलू स्तर पर विमानन क्षेत्र की मांग को पूरा करें बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकें।
श्री नायडू ने यहां “विश्व स्तरीय पायलट प्रशिक्षण के माध्यम से भारत के विमानन क्षेत्र को मजबूती प्रदान करना” विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विमानन क्षेत्र में लगातार मांग बढ़ती जा रही है और भारत अब न केवल विमानों के स्वदेशी विनिर्माण बल्कि उनके कल-पुर्जाें के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस अवसर पर उन्होंने 11 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन्स (एफटीओ) को आशय पत्र भी जारी किये।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण भारत का विमानन क्षेत्र अगले पांच वर्षों में महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए तैयार है। हम अब अगली पीढ़ी के पायलट प्रशिक्षण की आधारशिला रख रहे हैं और अगले पांच वर्षाें में देश में 500 नये विमान आयेंगे।
उन्होंने कहा कि देश में अगले दशक में लगभग 30,000 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी, जिससे युवाओं के लिए करियर के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे। सरकार ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए विमानन क्षेत्र का मजबूत होना काफी जरूरी है जिसके लिए पायलट प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दिया जायेगा। उन्होंने इन सभी एफटीओ से आग्रह किया कि वे इस स्तर के पायलट तैयार करें जो न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में पूरी तरह सक्षम हों।
श्री नायडू ने कहा कि सरकार ने पायलट प्रशिक्षण संस्थानों के लिए अनेक सुधारात्मक पहल की है जिनमें कारोबार करने में आसानी, एफटीओ में विमानों के बेड़े का विस्तार, प्रशिक्षण दक्षता में सुधार कैडेटों को वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (सीपीएल) प्राप्त करने में लगने वाले समय में कमी शामिल है। इसके अलावा, तकनीक का इस्तेमाल और प्रशिक्षु छात्रों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
नागर विमानन मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षाें में देश के विमानन क्षेत्र में काफी बदलाव आया है और उड़ान जैसी योजना क्रांतिकारी साबित हुई है। व्यापार में सुगमता लाने के लिए उदारीकृत एफटीओ नीतियों, हवाईअड्डों पर रॉयल्टी हटाने, भूमि किराये को युक्तिसंगत बनाने और सीपीएल परीक्षा प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण जैसे सुधार लागू किये गये हैं। भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नये नियामक ढांचे ने पायलट लाइसेंसिंग के लिए एकल-खिड़की प्रणाली को भी सक्षम बनाया है।
इस मौके पर “एफटीओ के लिए स्लॉट बुकिंग” मोबाइल ऐप की शुरुआत भी की गयी।
